Scanner क्या है, उपयोग ओर प्रकार

स्कैनर (Scanner) एक इनपुट डिवाइस है। कंप्यूटर डाटा या इन्फॉर्मेशन को डिजिटल में लेता है। Scanner क्या है इसलिए इमेज, डॉक्यूमेंट, टेक्स्ट इत्यादि को Scanner डिजिटल Format में Convert करके Computer में सेव करता है। स्कैनर की सहायता से डाटा को अपलोड करना आसान रहता है।

उदाहरण के तौर पर आपको मार्कशीट ई मेल करनी है, आपको पता है कि कंप्यूटर केवल डिजिटल Format को समझता है। इसलिये मार्कशीट Digital Format में ही होनी चाहिए। हार्ड कॉपी को डिजिटल में बदलने के लिये Scanner की आवश्यकता रहती है।

Computer में मौजूद “सॉफ्ट कॉपी” को “हार्ड कॉपी” में प्रिंट देने के लिए प्रिंटर होता है। ठीक इसके उलट “हार्ड कॉपी” को “सॉफ्ट कॉपी” में कंप्यूटर में सेव करने के लिए Scanner है। स्कैनर पेपर पर प्रिंट या लिखे हुए डाटा को कंप्यूटर में इमेज के रूप में सेव करता है। यह किसी भी प्रकार के प्रिंटेड पेज या इमेज को स्कैन कर सकता है। चाहे इमेज कलर हो या ब्लैक एंड व्हाइट।

 

 

Scanner क्या है, उपयोग ओर प्रकार
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Scanner क्या है?

Scanner एक इलेक्टोनिक इनपुट डिवाइस होता है जिसकी सहायता से कोई भी एक यूजर एक हार्ड कॉपी को सॉफ्ट कॉपी में परिवर्तन कर सकता है। सॉफ्ट कॉपी को हम डिजिटल कॉपी भी बोल सकते हैं क्यों की आप उस कॉपी को डिजिटली किसी भी डिवाइस पर स्टोर करके रख सकते है और समय आने पर उसको डिजीटली इस्तेमाल भी कर सकते हैं।अब आपके मन में सॉफ्ट कॉपी और हार्ड कॉपी को लेकर सबला रहा होगा की यह होता क्या है। तो आइए जानते हैं सॉफ्ट कॉपी और हार्ड कॉपी क्या होता है।

 

सॉफ्ट कॉपी क्या है? (Soft Copy)

 

सॉफ्ट कॉपी एक ऐसा कभी होता है जिसको हम सिर्फ देख सकते हैं पर उसको हम शारीरिक रूप से स्पर्श नहीं कर सकते। Soft copy को हम इलेक्ट्रॉनिक कॉपी भी बोलते हैं। आप कभी ना कभी ऑनलाइन में रिज्यूम या पीडीएफ फ़ाइल जरूर बनाए होंगे। नहीं तो आप कभी MS Word या Google docs पर जरूर कुछ काम किए होंगे। और आप उस फाइल कंप्यूटर में स्टोर करके रखे होंगे। तो वो जो फाइल होता है उस फाइल को आप एक सॉफ्ट कॉपी का उदाहरण ले सकते है।

 

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हार्ड कॉपी क्या है? (hard copy)

 

हार्ड कॉपी एक ऐसा कभी होता है जिसको हम शारीरिक रूप से स्पर्श भी कर सकते हैं और देख ही सकते हैं। एक कागज पर हमारे कुछ डाटा को हमारा इस्तेमाल के लिए छापते है, उसको बोला जाता है हार्ड कॉपी। हार कभी बनवाने के लिए आपको एक प्रिंटर की जरूरत होती है जो एक ब्लैंक पेपर पर आपके डाटा को छापते हैं। आप कभी किसी नोट्स को जरूर Xerox किए होंगे। Xerox करने के बाद आपको जो कॉपी मिलता है वो होता है हार्ड कॉपी।

अभी हम जब स्कैनर की बात कर रहे थे वहां पर एक शब्द आया जो है इनपुट डिवाइस। तो आइए संक्षिप्त में देख लेते हैं इनपुट डिवाइस क्या होता है और उनके कुछ उदाहरण।

 

इनपुट डिवाइस क्या है?

 

इनपुट डिवाइस एक डिवाइस होता है जिसके द्वारा हम हमारे डाटा को कंप्यूटर में इनपुट करा सकते हैं। यह एक इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस होता है और हमारा कंप्यूटर का एक हिस्सा है। हम एक इनपुट डिवाइस के द्वारा कंप्यूटर को कुछ कमांड्स दे सकते हैं। Keyboard, Computer Mouse, Lightpen, Microphone यह सब इनपुट डिवाइस का एक उदाहरण है।अभी आप जान चुके होंगे कि वास्तव में स्केनर का काम क्या होता है? यह देख लेते हैं Scanner कैसे काम करता है?

 

स्कैनर का इतिहास (History of Scanner in Hindi)

सबसे पहले स्कैनर को साल 1957 में अमेरिका की एक कंपनी National Bureau Of Standard में की गयी थी. इस Team का नेतृत्व Russel A. Kirsch कर रहे थे. यह एक ड्रम स्कैनर था. 

इस स्कैनर में पहली तस्वीर Russel A. Kirsch के 3 महीने के बेटे की ली गयी थी.और यह ब्लैक एंड वाइट थी. बाद में स्कैनर में और भी संशोधन किये गए और इसमें Color Inage को भी Scan किया जा सकता है. 

1975 में Ray Kurzaweli ने पहले फ्लैटबैड स्कैनर को बनाया था. आज के स्कैनर बहुत ही आधुनिक और Technology से युक्त हैं.  

 

स्कैनर कैसे काम करता है (How Does Scanner Work in Hindi)

 

स्कैनर को USB Cable के द्वारा कंप्यूटर से कनेक्ट किया जाता है. आधुनिक स्कैनर Wireless भी हैं जिन्हें ब्लूटूथ के द्वारा कंप्यूटर से कनेक्ट करते हैं. 

स्कैनर के कार्य करने के लिए पहले कंप्यूटर में एक स्कैनर का सॉफ्टवेयर Install करना पड़ता है. Scanner क्या है इसके बाद स्कैनर में हार्ड कॉपी को रखा जाता है. जिसे स्कैनर स्कैन करता है और कंप्यूटर में स्टोर करता हैं. कंप्यूटर में स्टोर डॉक्यूमेंट को यूजर अपने मुताबिक Editing कर सकता है. 

 

स्कैनर के प्रकार – Scanner Types In Hindi

 

  • 1. ड्रम स्कैनर
  • 2. फ्लैटबेड स्कैनर
  • 3.  हैंड स्कैनर
  • 4. OCR
  • 5. OMR
  • 6. MICR
  • 7. BCR

1. फ्लैटबेड स्कैनर (Flatbed Scanner) – इस प्रकार का स्कैनर सबसे ज्यादा उपयोग में लिया जाता है। इसमें पेपर या इमेज ऑटोमैटिक आगे बढ़ती है। इसमे एक कांच होता है जिस पर पेपर को रखकर स्कैन किया जाता है। कंप्यूटर में सबसे ज्यादा इसी Scanner का उपयोग किया जाता है।

2. ड्रम स्कैनर (Drum Scanner) – दुनिया का सबसे पहला स्कैनर यही था। इस प्रकार के स्कैनर में Photo Multiplier Tube का इस्तेमाल किया जाता है। Drum Scanner इमेज को अच्छी क्वालिटी के साथ स्कैन करता है। किताबें या मैग्ज़ीन छापने वाली कम्पनियां इस प्रकार के Scanner का इस्तेमाल करती है।

3. हैंड स्कैनर (Hand Scanner) – यह स्कैनर फ्लैटबेड की तरह ही होते है। हैंड स्कैनर में पेपर पर स्कैनर मैनुअली आगे बढ़ाते है।

4. ओसीआर (OCR) – OCR की फुल फॉर्म “Optical Character Recognition” है। पेपर पर प्रिंट किये हुए डाटा को ओसीआर आसानी से पढ़ लेता है। पासपोर्ट क्लियर करने में OCR का उपयोग है।

5. ओएमआर (OMR) – OMR की फुल फॉर्म “Optical Mark Recognition” है। उत्तर पुस्तिका की जांच करने में ओएमआर का उपयोग किया जाता है।

6. बार कॉड रीडर (BCR) – इस प्रकार का स्कैनर बार कॉड को रीड करने में काम आता है । प्रोडक्ट पर बार कोड आता है जिस पर उस प्रोडक्ट की जानकारी होती है।

7. मैग्नेटिक इंक करैक्टर रिकॉग्निशन (MICR) – इस प्रकार के स्कैनर का उपयोग मैग्नेटिक कैरेक्टर को पढ़ने में होता है। बैंकों में चेक क्लियर करने में MICR का कार्य है।

ये सभी कंप्यूटर Scanner है लेकिन एक बायोमेट्रिक स्कैनर भी होता है। इसके द्वारा फिंगरप्रिंट को स्कैन किया जाता है।

स्कैनर से आउटपुट डाटा

 

स्कैनर प्रिंटेड डॉक्यूमेंट या इमेज को स्कैन करता है जिस से हमे कलर या ब्लैक एंड वाइट डॉक्यूमेंट का आउटपुट मिलता है लेकिन आज कल के सारे आधुनिक स्कैनर कलर में काम करते हैं। स्कैन किआ हुआ इमेज नॉन कंप्रेस आरजीबी कलर में होता है जिसे हम कंप्यूटर के मेमोरी में ट्रांसफर करते है और इसे ग्राफ़िक्स एडिटिंग प्रोग्राम जैसे की एडोबी फोटोशॉप, माइक्रोसॉफ्ट पेंट, करेल पेंटर से एडिट कर सकते है।

जो भी हम स्कैन करते है इसको अलग फाइल फॉर्मेट में रख सकते है जैसे की TIFFPNG, JPEGPDF इत्यादि अगर हमारा डॉक्यूमेंट में टेक्स्ट ज्यादा है तो TIFF और PDF फॉर्मेट से टेक्स्ट को कन्वर्ट करके एडिट कर सकते है लेकिन सिर्फ इमेज है PNG, JPEG, फॉर्मेट अनुकूल होता है।

 

स्कैनर खरीदते समय किन बातों का रखे ध्यान

 

आप जब भी स्कैनर खरीदने का विचार बनाते हैं तो कुछ बातों पर गौर करना बेहद आवश्यक है। नीचे हम उन सभी बातों का उल्लेख कर रहे हैं

उद्देश्य

सबसे पहले तो आपको यह सुनिश्चित करना है की आपको वास्तव में स्कैनर की जरूरत क्यों है? कई बार हम ऐसे कई उपकरण खरीद लेते है जहां बाद में हमें ज्ञात होता है की वाकई इसकी इतनी आवश्यकता ही नहीं थी।

 

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स्पीड

पता करें कि आपको कितनी मात्रा में दस्तावेजों को स्कैन करने की जरूरत है। अगर आपकी मांग कम है तो स्पीड आपके लिए कोई मायने नहीं रखता हैं, Scanner क्या है पर अगर आप ज्यादा मात्रा में स्कैन करने के उद्देश्य से ले रहे है तो आपको एक ऐसे स्कैनर की दरकार है जो कम समय में ज्यादा तेजी से स्कैन करने में सक्षम हो।

कीमत

अक्सर एक स्कैनर का चयन करने में महत्वपूर्ण कारक उसके कीमत को लेकर होती है। बात बिलकुल आसान है, आप जितना ज्यादा पैसा लगाएंगे उतने ही ज्यादा फीचर्स आपको मिलेंगे। अगर कम कीमत की ओर आपकी नजर है तो फीचर के साथ कुछ समझौता करना पड़ेगा।

रेजोल्यूशन

प्रत्येक स्कैनर एक निश्चित संख्या में डॉट्स प्रति इंच (डीपीआई) पर स्कैन करता है। नियमित दस्तावेज़ों के लिए, 600dpi ठीक है, लेकिन यदि आप फ़ोटो के साथ काम करते हैं तो आपको उच्च रिज़ॉल्यूशन की आवश्यकता हो सकती है। तो विचार करे की आपको कितने रेजोल्यूशन तक स्कैन करना है।

 

दस्तावेज़ प्रकार

आपको यह भी सुनिश्चित करना चाहिए कि आप किस प्रकार के दस्तावेज़ों को स्कैन करने की योजना बना रहे हैं। इसमें कागज का आकार, स्याही और कागज दोनों के रंग और यहां तक कि कागज का प्रकार भी शामिल है। ये सभी कारक यह निर्धारित करने में मदद करेंगे कि आपकी आवश्यकताओं के लिए कौन सा स्कैनर सबसे अच्छा है। क्योंकि कुछ स्कैनर कुछ कागज़ या रंगों के साथ बेहतर काम करते हैं, इसलिए सुनिश्चित करें कि आप अपने दस्तावेज़ की ज़रूरतों के अनुरूप एक का चयन करें।

सॉफ्टवेयर क्षमता

ऑप्टिकल रिकग्निशन सॉफ्टवेयर के साथ स्कैनर मशीन से उत्पन्न दस्तावेज़ को वर्ड या टेक्स्ट फ़ाइल के रूप में सहेज सकता है जिसे आप बाद में संपादित कर सकते हैं, जिससे बहुत समय बचता है। तो जितना अच्छा और लेटेस्ट सॉफ्टवेयर होगा, उतना ही अच्छा वो कार्य करेगा।

 

Scanner के उपयोग क्या है?

 

आमतौर पर आप परीक्षाओं के फॉर्म ऑनलाइन Fill Up करते हो। ऑनलाइन फॉर्म के लिए आवश्यक सभी डाक्यूमेंट्स जैसे कि फ़ोटो, मार्कशीट, सिग्नेचर इत्यादि को ऑनलाइन अपलोड करना होता है। स्कैनर का कार्य इन सभी डॉक्यूमेंट को स्कैन करके Digital Format में चेंज करना है।

प्रतियोगी परीक्षाओं में उत्तर पुस्तिका के रूप में अभ्यर्थियों को ओएमआर शीट दी जाती है। इस OMR शीट की जांच OMR स्कैनर के द्वारा करते हैं। पुस्तकों को ऑनलाइन अपलोड करने के लिए Scanner का उपयोग किया जाता है। ई बुक के माध्यम से हम ऑनलाइन लर्निंग करते है। यह स्कैनर से सम्भव हुआ है।

वर्तमान में स्कैनर All In One आता है। इसका आशय यह है कि MFD (Multi Functional Device) डिवाइस का उपयोग होता है जिसमें Scanner, प्रिंटर, फोटोकॉपी तीनो होते है। स्कैन की हुई इमेज मूल इमेज से क्वालिटी में कम होती है। आपके स्मार्टफोन का कैमरा भी एक Scanner की तरह इस्तेमाल किया जा सकता है।

स्कैनर उपयोग करने के लाभ (Advantages)

 

घर और कार्यस्थल में Scanner का उपयोग करने के निश्चित रूप से कई सारे लाभ है। यह डिवाइस आपकी कार्यक्षमता और दक्षता को बढ़ाने में मदद करता है। नीचे Scanner का उपयोग करने के कुछ मुख्य लाभ बताये गए है।

आज के समय मार्केट में ऐसे Scanners मौजूद है जो आपको High-resolution Scans प्रदान करते है। आप अधिक डिटेल के साथ उच्च गुणवत्ता वाले Document और Images को प्राप्त कर पाते है।

अक्सर Paper Document के क्षतिग्रस्त होने, गुम होने और चोरी हो जाने की संभावना बनी रहती है। Scanner की मदद से आप उन सभी Documents की Digital Copies बना कर अपने कंप्यूटर में सेव कर सकते है।

इनका एक मुख्य लाभ ये है कि इसे उपयोग करना बेहद आसान है। इसके लिये आपको किसी जटिल सेटअप या कॉन्फ़िगरेशन की आवश्यकता नही होती है।

आप अपनी महत्वपूर्ण डॉक्यूमेंट फाइलों को जल्दी और आसानी से प्राप्त कर सकते है। जबकि अगर वह डाक्यूमेंट्स आपके Desk में या Drawer में रखे होते तो आपको काफी समय लगता किसी विशेष डॉक्यूमेंट को ढूढ़ने में।

इनका उपयोग करना Environmental Friendly होता है। चूंकि आप अपने दस्तावेजों को Digital Files के रूप में सेव करते है। इससे पेपर की बर्बादी नही होती और यह पर्यावरण की दृष्टि से फायदेमंद है।

Scanned Documents अधिक सुरक्षित किये जा सकते है। आप अपने महत्वपूर्ण दस्तावेज फाइलों को स्कैन करके पासवर्ड द्वारा सुरक्षित बना सकते है।

आप Scanned Documents को Word Processor का उपयोग करके आसानी से Edit कर सकते है।

Scanner की मदद से आप दस्तावेजों या छवियों को विभिन्न File Formats जैसे PDF, इत्यादि में सेव कर सकते है।

स्कैनर के नुकसान – Disadvantages of Scanner in Hindi

 

एक स्कैनर के काफी फायदे भी हैं लेकिन इससे निम्नलिखित हानियां भी है –

  • स्कैनर का उपयोग करके हम किसी चित्र या टेक्स्ट की मूल गुणवत्ता खो देते हैं.
  • स्कैन की गई छवियां या टेक्स्ट या दस्तावेज़ आपके कंप्यूटर सिस्टम में बहुत अधिक जगह ले सकते हैं.
  • स्कैनर रखरखाव महंगा हो सकता है.
  • यह एक चुनने और क्लिक करने की प्रक्रिया है जिसका अर्थ है कि यह एक समय लेने वाली प्रक्रिया है. अगर हमें कई टेक्स्ट या चित्रों को स्कैन करने की आवश्यकता है तो इसे चुनने और स्कैन करने में समय लगता है.

 

 

MICR कौन सा डिवाइस है?

MICR (Magnetic Character Recognition) एक इनपुट डिवाइस है.

स्कैनर का अविष्कार किसने किया था?

स्कैनर का अविष्कार सन 1957 में Russel A. Kirsch ने की थी.

स्कैनर और प्रिंटर में क्या अंतर है?

प्रिंटर के द्वारा कंप्यूटर में सेव सॉफ्ट कॉपी को हार्ड कॉपी में बदलते हैं जबकि स्कैनर के द्वारा हार्ड कॉपी को सॉफ्ट कॉपी में बदलकर कंप्यूटर में सेव किया जाता है.

पहला फ्लैटबैड स्कैनर का अविष्कार किसने किया?

1975 में Ray Kurzaweli ने पहले फ्लैटबैड स्कैनर की खोज की.

स्कैनर कौन सा डिवाइस है?

स्कैनर कंप्यूटर का एक Input Device है.

स्कैनर का कार्य क्या है?

स्कैनर Hard Copy को Scan करके Soft Copy में Convert करके कंप्यूटर में स्टोर करता है.

स्कैन कैसे करते हैं?

जिस भी Document को स्कैन करना होता है उसे स्कैनर के अन्दर रखा जाता है. स्कैनर पहले Document को स्कैन कर लेते हैं और फिर Scan Document को Process करने के लिए कंप्यूटर सिस्टम में स्टोर किया जाता है.

 

Conclusion

 

तो दोस्तों आपको मेरी यह लेख Scanner क्या है, उपयोग ओर प्रकार जरुर पसंद आई होगी. मेरी हमेशा से यही कोशिश रहती है की readers को पूरी जानकारी प्रदान की जाये जिससे उन्हें किसी दुसरे sites या internet में उस article के सन्दर्भ में खोजने की जरुरत ही नहीं है. इससे उनकी समय की बचत भी होगी और एक ही जगह में उन्हें सभी information भी मिल जायेंगे.

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