Communication Kya Hai? कम्युनिकेशन प्रकार एवं प्रक्रिया हिंदी में!

 

आज हमारी इस पोस्ट में आपको कम्युनिकेशन क्या है Communication Kya Hai और How Many Steps of Information And Communication Structure in Hindi से जुड़ी सारी जानकारी मिल जाएगी। और हम आपको यह बिल्कुल सरल भाषा में समझाएँगे। आशा करते है की आपको हमारी सभी पोस्ट पसंद आ रही होगी। और इसी तरह आप आगे भी हमारे ब्लॉग पर आने वाली सारी पोस्ट पसंद करते रहे।

Technology की इस दुनिया में संचार के बहुत से साधन उपलब्ध हो गये है। कम्युनिकेशन के इन सभी साधनों ने संचार को बहुत ही सरल बना दिया है। तो दोस्तों आइये अब Communication Hindi Meaning को Detail में जानते है। और यदि आप Communication Kise Kahate Hain की जानकारी अच्छे से प्राप्त करना चाहते हैं, तो यह पोस्ट What is Communication Process in Hindi शुरू से अंत तक ज़रुर पढ़े।

Communication Kya Hai? कम्युनिकेशन प्रकार एवं प्रक्रिया हिंदी में!
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 Communication Kya Hai

 

किसी जानकारी या सूचनाओं के आदान-प्रदान की प्रक्रिया को Communication या संचार कहते हैं। अर्थात जब किसी माध्यम से हम अपनी जानकारी को दूसरों तक पहुँचाते है तो इसे संचार यानि कम्युनिकेशन कहा जाता है। वर्तमान में सूचनाओं का आदान-प्रदान करना बहुत ही सरल हो गया है। Communication Kya Hai क्योंकि आजकल किसी भी सूचना एवं जानकारी का आदान-प्रदान करने के लिए हमारे पास इतने साधन उपलब्ध हो गए हैं कि अब बहुत ही कम समय में हम किसी भी जानकारी को हमारे द्वारा किसी अन्य व्यक्ति तक पहुंचा सकते हैं।

पहले सूचनाओं को एक जगह से दूसरी जगह तक भेजने में बहुत समय लगता था। लेकिन आज लोग घर बैठे ही एक देश से दूसरे देश तक अपनी सूचनाओं को बड़ी ही आसानी से पहुंचा सकते है और समय भी कम लगता है। वर्तमान समय में Communication का सबसे पहला और अच्छा माध्यम हमारी आवाज और भाषा होती है, इसी के माध्यम से ही मनुष्य अपने विचारों, भावों को एक-दूसरे से बाँटता है। आवाज यानि बातचीत के माध्यम से ही मनुष्य एक दूसरे से आपस में जुड़ा रहता है।

 

कम्युनिकेशन का हिंदी अर्थ क्या होता है

 

Hindi Meaning of Communication यानि कम्युनिकेशन का हिंदी अर्थ संचार” होता है। Communication एक लैटिन शब्द है, जिसका मतलब होता है सूचनाओं का आदान प्रदान अथवा किसी जानकारी, विचार या भावनाओं को शेयर करना।

 

Definition Of Communication In Hindi

 

Communication शब्द लैटिन भाषा के Communist से बना है। सूचना प्रोद्योगिकी ने Communication को और सरल बना दिया है। इसमें सबसे ज्यादा Internet प्रयोग में आता है। Internet के द्वारा हम कभी भी किसी भी समय और कम समय में सूचनाओं का आदान-प्रदान कर सकते हैं।

 

समय के साथ बदलता संचार (Communication)

 

चाहे मनुष्य हो या जीव जंतु सभी अपने भावो और आवाज से communication करते है | इंसानो ने भी समय के साथ कम्युनिकेशन के तरीकों में निरंतर उन्नति की है | पहले कम्युनिकेशन के लिए पत्र (Latter)भेजे जाते है | उसके बाद फैक्स, फिर पेजर आये जिनमे केवल message के जरिये संचार किया जाता था | Communication Kya Hai उसके बाद आये फोन जिनमें बोलकर एक जगह से दूर बैठे व्यक्ति से बात की जा सकती थी | अब टेक्नोलॉजी ने और उन्नति करके स्मर्टफ़ोन आये जिसमें हम ना सिर्फ बात कर सकते है बल्कि वीडियो चैट के द्वारा एक दूसरे को देख भी सकते है |

 

टेक्नोलॉजी में संचार के प्रकार

 

Simplex ( सिम्पलेक्स)

सिंपलेक्स के माध्यम से यदि आप किसी को सूचना पहुंचाना चाहते हैं तो यह केवल एक ही दिशा में कार्य करती है कहने का मतलब यह है कि या तो सिंपलेक्स द्वारा आप सूचना भेज सकते हैं या फिर आप सूचना प्राप्त कर सकते हैं। उदाहरण के तौर पर टीवी से हम केवल सूचनाएं प्राप्त कर सकते हैं लेकिन भेज नहीं सकते और कंप्यूटर में कीबोर्ड के माध्यम से हम अपनी सूचना भेज सकते हैं।

Half Duplex ( हाफ डुप्लेक्स)

हाफ डुप्लेक्स के माध्यम से आप किसी भी सूचना एवं जानकारी का आदान-प्रदान दोनों और से कर सकते हैं लेकिन यह एक ही समय पर संभव होता है।जैसे कि उदाहरण के तौर पर मान लीजिए कि अगर आप पेन ड्राइव में कुछ डाटा कंप्यूटर में सेव करते हैं तो उस समय आप उसको ओपन नहीं कर सकते।

Full Duplex ( पूर्ण डुप्लेक्स)

फुल डुप्लेक्स यह एक ऐसा माध्यम है जहां पर दोनों और से सूचनाओं का आदान-प्रदान एक ही समय पर किया जा सकता है उदाहरण के तौर पर जैसे कि आपका स्मार्टफोन।

Communication कितने प्रकार के होते हैं?

 

संचार चार प्रकार के होते हैं-
1. Intrapersonal communication
2. Interpersonal communication
3. Group communication
4. Mass Communication
5. Sender/source
6. Message
7. Encoding
8. Medium
9. decoding
10. Receiver

Intrapersonal communication:

Intrapersonal कम्युनिकेशन में व्यक्ति खुद से कम्युनिकेशन करता है intrapersonal में व्यक्ति अकेला होता है और अपने मन में सोच विचार करता है एवं तरह-तरह की योजना बनाता है अगर कोई व्यक्ति कुछ सोचता है या फिर सपना देखता है या कुछ सोचता है तो वह intrapersonal कम्युनिकेशन कहलाता है।

Interpersonal communication :

इस संचार में 2 प्रकार के लोग शामिल होते है। दो व्यक्ति जब आपस में एक दूसरे से बात करते है तो वह interpersonal communication कहलाता है। इस communication में व्यक्ति आमने -सामने होता है। इस communication में दो व्यक्ति के बीच सीधा संपर्क होता है।

Group communication:

इसमें group में communication होता है तो इसे समूह संचार कहते हैं। हरेक व्यक्ति किसी ना किसी समूह का सदस्य होता है। समूह में जितने भी व्यक्ति होते है किसी ना किसी विषय पर कुछ बातचीत करतें है तो वह group communication कहलाता है।

Mass communication :

इस संचार का मतलब जन-संचार होता है। Communication Kya Hai समूह संचार का यह एक बड़ा रूप होता है। जन-संचार का अर्थ संचार के माध्यम से जनता तक सूचना पहुंचाने का होता है एवं जन समूह के साथ संचार करने से होता है।

Sender/source :

किसी सूचना को दूसरे तक पहुंचाने वाले को सेंडर कहते हैं। इसमें व्यक्ति अपने विचारों का आदान प्रदान करता है तथा जिसके द्वारा सूचना भेजा जाता है उसे sender या source कहलाता है.

Message :

Sender किसी व्यक्ति को message भेजता है इसमें व्यक्ति अपनी विचारों को संदेश द्वारा भेजता है इसमें संदेश किसी चित्र या सकेंत के रूप मे होते हैं।

Encoding :

Encoding में हम दी गई सूचना को समझने के लिए सकेंत का प्रयोग करते हैं।

Medium:

संदेश भेजने के लिए जिन साधनों का प्रयोग हम करतें है वह माध्यम कहलाता है। इसमें हम अपने संदेश दुसरे व्यक्ति तक पहुंचाते हैं। माध्यम के भी कई प्रकार होते है।

Decoding :

Decoding को हिंदी में कूट संकेतन कहते हैं। प्रक्रिया में प्राप्त कर्ता sender से कूट संकेतों को ग्रहण करता है।

Receiver:

संदेश को प्राप्त करने वाले को रिसीवर कहते हैं जिसके लिए संदेश भेजा जाता है वह रिसीवर का लाता है रिसीवर संदेश को प्राप्त कर के सामने वाले की बातों को समझता है।

 

Important Elements of Communication

 

कम्युनिकेशन का संचालन करने के लिए तीन एलिमेंटस् आवश्यक होते हैं अर्थात् प्रेषक, एक माध्यम (जिस पर सूचना संचालित की जाती है) Communication Kya Hai  और एक प्राप्तकर्ता। प्रेषक उस मैसेज की पूरी समझ के साथ सबसे अधिक शामिल व्यक्ति है जिसे वह वितरित करना चाहता है। दूसरी ओर, रिसीवर को प्रेषक और जानकारी के विषय के बारे में जरूरी नहीं पता होता है कि प्रेषक का उद्देश्य क्या है।

प्रेषक आमतौर पर शब्दों और गैर-मौखिक कम्युनिकेशन के मिश्रण से मैसेज को एनकोड करता है। इसे कुछ तरीकों से प्रसारित किया जाता है (उदाहरण के लिए, भाषण या लेखन में), और प्राप्तकर्ता इसे ‘डीकोड’ करता है।बेशक, एक से अधिक प्राप्तकर्ता हो सकते हैं, और कम्युनिकेशन की जटिलता का अर्थ है कि प्रत्येक को थोड़ा अलग मैसेज प्राप्त हो सकता है। दो लोग शब्दों और / या बॉडी लैंग्वेज के चुनाव में बहुत अलग चीजें पढ़ सकते हैं। यह भी संभव है कि उनमें से किसी के पास प्रेषक के समान समझ नहीं होगी।

आमने-सामने कम्युनिकेशन में, प्रेषक और प्राप्तकर्ता की भूमिकाएं अलग-अलग नहीं हैं। बात कर रहे दो लोगों के बीच दोनों की भूमिकाएँ पीछे और आगे से गुजरेंगी। दोनों पार्टियां एक दूसरे के साथ संवाद करती हैं, भले ही बहुत सूक्ष्म तरीकों से जैसे कि आंखों के संपर्क (या कमी) और सामान्य शरीर की भाषा के माध्यम से। लिखित कम्युनिकेशन में, हालांकि, प्रेषक और प्राप्तकर्ता अधिक विशिष्ट हैं।

 

History of Communication in Hindi:

 

कम्युनिकेशन का इतिहास

Ancient Means Of Communication

क्या आपने कभी सोचा है कि प्राचीन लोगों ने कैसे संवाद किया था? खैर, उन्होंने अपने संदेशों को संप्रेषित करने के लिए पत्थर के शिलालेख का इस्तेमाल किया। और ये संदेश वास्तव में स्पष्ट करने के लिए हैं कि वे भविष्य की पीढ़ियों द्वारा पढ़ने में सक्षम हैं। यह पद्धति उनकी संस्कृति के विकास के लिए बहुत फायदेमंद थी, Communication Kya Hai और ये शिलालेख एक छेनी और हथौड़ा के काम से बने थे। एक धारणा है कि प्राचीन सेमिटिक भाषाओं की दायीं-बायीं दिशा, जो कि अरबी और हिब्रू है, संभवतः इस तथ्य से आई है कि अधिकांश दाएं हाथ के लोगों को इस तरह से छेनी का उपयोग करना आसान लगा।

 

विभिन्न भाषाओं का विकास

भाषाओं के विकास के बाद से सरल मौखिक कम्युनिकेशन मौजूद है। कम्युनिकेशन का इतिहास 3,300 ईसा पूर्व का है जब लेखन का आविष्कार किया गया था और पहली बार इराक में इसका इस्तेमाल किया गया था। उसके बाद, विभिन्न प्रकार की लेखन शैलियों का विकास हुआ। मिस्रियों ने 3,100 ईसा पूर्व में चित्रलिपि लेखन का विकास किया। इसी तरह, यूनानियों ने लिखने की फोनेटिक स्‍टाइल को डेवपल किया यानी लेफ्ट से राइट की और लिखना। 1250 ईसा पूर्व में, सीरिया में पहली बार विश्वकोश लिखा गया था।

 

पहली डाक प्रणाली

900 ईसा पूर्व में, चीन सरकार द्वारा पहली बार डाक प्रणाली की स्थापना की गई थी। बाद में, रोम, फारस, सीरिया और मिस्र सहित अन्य सभ्यताओं ने भी डाक प्रणाली की प्रगति में योगदान दिया। इस प्रारंभिक डाक प्रणाली में मुख्य वाहक के रूप में घोड़ों का उपयोग किया गया था। वहां रिले स्टेशन स्थापित किए गए थे जहां घोड़ों को सूचना देने के लिए आवश्यक था।

 

लेखन सामग्री का विकास

पहले कागज की कोई अवधारणा नहीं थी। लोग पत्थरों, पत्तियों, हड्डियों या घोड़े की पीठ पर संदेश लिखकर संवाद करते थे। इसके अलावा, तारों के लिए कोई उचित साधन नहीं थे। संदेशों को कोयले या अन्य उपयोगी उपकरणों के साथ बाँधा जाता था। इस तरह की सूचना का आदान-प्रदान चीन और मिस्र में सबसे आम था। 1700 ईसा पूर्व में, लेखन सतहों को बेहतर बनाने के लिए कुछ विकास किया गया था। लोगों ने पैपाइरस रोल और हल्के वजन वाले चर्मपत्रों का उपयोग सूखे मेवों से किया। ये सतह बहुत बेहतर थे क्योंकि वे आसानी से पोर्टेबल थे और लंबी अवधि के लिए लेखन के रंग को बरकरार रख सकते थे। अन्यथा पत्थरों, हड्डियों और घोड़ों पर लिखना बहुत कम समय में लुप्त हो जाने का खतरा था। इसलिए, लोगों को यह समझने में कठिनाई हो रही है कि प्रेषक द्वारा वास्तव में क्या लिखा गया था।

776 ईसा पूर्व में, संदेश के वाहक के रूप में घर के कबूतरों का उपयोग करने के लिए एक नया विचार पेश किया गया था, और इस तकनीक ने वास्तव में अच्छी तरह से काम किया। एक लिखित संदेश एक कबूतर के पंखों के साथ बांधा जाता था,Communication Kya Hai और कबूतर इसे इच्छित प्राप्तकर्ता को देने के लिए भेजा जाता था। यह अच्छा था क्योंकि इससे समय की बचत हुई और कबूतरों की यात्रा का समय अपेक्षाकृत कम था।

लेकिन यह कम्युनिकेशन का एक विश्वसनीय तरीका नहीं था। संदेश हस्तांतरण केवल पक्षी की भलाई पर निर्भर था, और अगर कोई कबूतर खतरे में फंस जाता था, जो एक सामान्य घटना थी, तो संदेश बर्बाद हो जाता था।

 

छपाई का आविष्कार

 

बेहतर कम्युनिकेशन की दिशा में अगली प्रगति प्रिंट तकनीक का आविष्कार था। मुद्रण का आविष्कार सबसे पहले 1500 ईसा पूर्व में चीनियों ने किया था। इसके अलावा, पहली बार लेखन उपकरण, पेंसिल का आविष्कार 1565 में किया गया था।

मुद्रण पहली बार 6 वीं शताब्दी में ब्लॉकों द्वारा किया जाता था। उस समय ब्लॉक प्रिंटिंग का उपयोग करते हुए पहली ज्ञात पुस्तक 686 का डायमंड सूत्र थी। बाद में 15 वीं शताब्दी के मध्य में, यूरोप में जोहान्स गुटेनबर्ग नामक एक व्यक्ति ने प्रेस का आविष्कार किया। इसने कम्युनिकेशन प्रक्रिया में क्रांति ला दी, क्योंकि पुस्तकों की छपाई आसान और सस्ती हो गई। इसने अखबार की छपाई की नींव भी रखी। बाद में प्रिंटिंग प्रेस के विचार ने अन्य देशों में भी लोकप्रियता हासिल करना शुरू कर दिया।

समाचार पत्रों की शुरूआत ने मुद्रण में लोगों की रुचि बढ़ाई और कम्युनिकेशन तंत्र को आगे बढ़ाने में मदद की।

 

अखबार का आविष्कार

 

15 वीं शताब्दी में गुटेनबर्ग द्वारा स्थापित प्रिंटिंग प्रेस ने समाचार पत्रों का विचार प्रस्तुत किया, इस प्रकार समाचार पत्र मुद्रण का आविष्कार हुआ। पहली बार जो समाचार पत्र प्रकाशित हुआ था, वह 1641 में इंग्लैंड में था। हालांकि, ‘अखबार’ नाम को 1670 तक गढ़ा नहीं गया था।

 

19 वीं शताब्दी में कम्युनिकेशन

 

कम्युनिकेशन के विकास ने धीरे-धीरे लोगों को नए और प्रभावी विचारों और अवधारणाओं को उजागर करना जारी रखा। 19 वीं शताब्दी की शुरुआत ने कम्युनिकेशन की दुनिया में कई नई अवधारणाओं को पेश किया। यह कार्बन पेपर और टेलीग्राफ सहित उल्लेखनीय आविष्कारों के लिए जिम्मेदार है। रिले स्टेशनों के बजाय, उचित चैनलों के लिए नींव बिछाने के लिए विकास हुए जिन्होंने पूरे अटलांटिक में कम्युनिकेशन करना संभव बना दिया।

19 वीं शताब्दी के मध्य में, फैक्स मशीन का आविष्कार किया गया था। वर्ष 1876 में अलेक्जेंडर ग्राहम बेल द्वारा टेलीफोन के अविश्वसनीय आविष्कार के लिए जिम्मेदार है। यह उपकरण पिछले आविष्कारों से अलग था क्योंकि इसने लंबी दूरी पर सूचना देने के लिए आवश्यक समय को काफी कम कर दिया था।

 

20 वीं शताब्दी में कम्युनिकेशन

20 वीं शताब्दी में, एक विकास हुआ था जिसके कारण रेडियो और टेलीविजन प्रसारण की खोज हुई थी। कम्युनिकेशन को इलेक्ट्रॉनिक माध्यमों से संचालित किया जाना था।

1960 में, कम्युनिकेशन सैटेलाइट को पेश किया गया। वैज्ञानिकों ने कम्युनिकेशन में चमत्कार करने के लिए विभिन्न तकनीकों की शुरुआत की। कम्युनिकेशन में क्रांति लाने के लिए echoes और laser तकनीक का आविष्कार किया गया था। बाद में भारी वज़न वाले टेलीफोन को मोबाइल फोन में बदल गया। इसके अलावा, 19 वीं शताब्दी के अंत में इंटरनेट और वेब सेवाएं प्रख्यात हो गईं।

 

Types Of Communication In Hindi

 

टाइप्स ऑफ कम्युनिकेशन यानि संचार के 4 प्रकार होते है तो आइये जानते है संचार के प्रकार क्या होते है:

  • Intrapersonal Communication

 

इसमें व्यक्ति खुद से Communication करता है। तथा इसमें व्यक्ति अकेला होता है। इसका मतलब यह होता है की मनुष्य मन में सोच-विचार करता है, योजना बनाता है यदि कोई व्यक्ति सपना देखता है या कुछ सोचता है तो वह Intrapersonal Communication के अंतर्गत आता है।

  • Interpersonal Communication

संचार के इस प्रकार में 2 लोग शामिल होते है। जब 2 व्यक्ति आपस में एक-दूसरे से बात करते है तो इसे Interpersonal Communication कहा जाता है। यह Communication आमने-सामने होता है। यह कहीं पर भी शब्द, चित्र, संकेत के रूप में हो सकता है। इसमें दो लोगों के मध्य सीधा संपर्क होता है।

 

  • Group Communication

 

इसमें Communication Group में किया जाता है। जैसा की इसके नाम से ही पता चलता है जिसे समूह संचार कहा जाता है। प्रत्येक व्यक्ति किसी ना किसी समूह का सदस्य होता है। जब समूह के कुछ लोग 2 से ज्यादा व्यक्ति किसी विषय पर कुछ बातचीत करते है तो उसे Group Communication कहा जाता है।

  • Mass Communication

 

इसका मतलब जन-संचार से होता है। यह समूह संचार का एक बड़ा रूप होता है। इसका अर्थ जनता तक संचार माध्यमों की सहायता से किसी सूचना को पहुँचाना होता है। जन-संचार का अर्थ किसी बड़े जन समूह के साथ संचार करने से होता है।

 

Communication Process In Hindi

 

हम रोज अपने जीवन में संचार की प्रक्रिया का उपयोग करते है। इसकी प्रक्रिया कुछ इस प्रकार है:

Communication Process

  • Sender/Source(स्रोत)

किसी सूचना को दूसरों तक पहुँचाने वाला Sender कहलाता है। संचार करते समय व्यक्ति अपने विचारों का आदान-प्रदान करता है। तथा जिसके द्वारा कुछ बोला जाता है, या सूचना को भेजा जाता है उसे Sender कहा जाता है।

  • Message(संदेश)

Sender किसी व्यक्ति को संदेश भेजता है। इसमें वह अपने मन में आये हुए विचारों को भेजता है। यह किसी चित्र या संकेत के रूप में हो सकते है।

  • Encoding(संकेतन)

जब हम दी गई सूचना को समझने के लिए संकेतों का प्रयोग करते है। Encoding करना कहलाता है।

  • Medium(माध्यम)

संदेश भेजने के लिए जिन साधनों का प्रयोग किया जाता है वह माध्यम कहलाता है। जिससे हम अपने संदेश दुसरो तक पहुँचाते है। माध्यम भी कई प्रकार के होते है।

  • Decoding(कूट संकेतन)

यह वह प्रक्रिया होती है जिसमें प्राप्त कर्ता Sender से कूट संकेतों को ग्रहण करता है।

  • Receiver(प्राप्त कर्ता)

Receiver वह होता है जो संदेश को प्राप्त करता है। तथा जिसके लिए संदेश को भेजा जाता है। वह इस संदेश को प्राप्त करके सामने वाले की बात को समझता है।

  • Feedback(प्रति पुष्टि)

यह एक प्रकार की सूचना होती है। जो प्राप्त कर्ता के द्वारा Sender को दी जाती है। इसके आधार पर ही Sender यह समझ पाता है की उसके द्वारा दी गई सूचना में कोई बदलाव की जरूरत है या नहीं।

 

कम्युनिकेशन करने के प्रमुख पार्ट

 

मैसेज ( Message)

जिस का आदान प्रदान किया जाता है यह सूचना या डाटा होता है।

प्रेषक या भेजने वाला (Sender )

किसी भी इन्फ्रमेशन को भेजने वाला सेंडर कहलाता है।

माध्यम (Mediam)

जब हम किसी सूचना या इंफॉर्मेशन को जिस माध्यम से दूसरों तक भेजते हैं उसे माध्यम कहते हैं। जैसे कि उदाहरण के तौर पर यदि हम किसी से बात करके कम्युनिकेट कर रहे हैं तो आवाज हमारा माध्यम है। ओर अगर हम किसी को लेटर लिखकर अपनी सूचना भेजते हैं तो वह लेटर हमारा माध्यम बनता है।

प्राप्त करने वाला ( Reciver)

हमारे द्वारा भेजी गई सूचना जो व्यक्ति प्राप्त करता है उसे रिसीवर कहते है। उदाहरण के तौर पर हमारी सूचना प्राप्त करने वाला व्यक्ति हमारा टेलीफोन या कंप्यूटर भी हो सकता है।

Decoding ( कूट संकेत)

किसी भी सुचना को या तो सीधे शब्दों में या फिर किसी कूट संकेत के द्वारा भेजा जाता है। इन संकेतो को समझकर रिसीवर इनको अनकोड करता है।

प्रोटोकॉल

किसी से भी हमारी सूचनाएं का आदान प्रदान करने के लिए कुछ नियम बने हुए होते हैं जिनके आधार पर ही हम उनसे कम्युनिकेट कर सकते हैं।उदाहरण के तौर पर मान लीजिए कि हम ब्लूटूथ के जरिए दो मोबाइल को कम्युनिकेट कर किसी भी तरह का डाटा का आदान-प्रदान कर सकते हैं तो वह एक प्रोटोकॉल के माध्यम से ही संभव हो सकता है।

 

Conclusion

 

मुझे उम्मीद है की आपको मेरी यह लेख Communication Kya Hai? कम्युनिकेशन प्रकार एवं प्रक्रिया हिंदी में! जरुर पसंद आई होगी. मेरी हमेशा से यही कोशिश रहती है की readers को पूरी जानकारी प्रदान की जाये जिससे उन्हें किसी दुसरे sites या internet में उस article के सन्दर्भ में खोजने की जरुरत ही नहीं है. इससे उनकी समय की बचत भी होगी और एक ही जगह में उन्हें सभी information भी मिल जायेंगे.

यदि आपके मन में इस article को लेकर कोई भी doubts हैं या आप चाहते हैं की इसमें कुछ सुधार होनी चाहिए, तब इसके लिए आप नीचे comments लिख सकते हैं.यदि आपको यह लेख पसंद आया या कुछ सीखने को मिला तब कृपया इस पोस्ट को Social Networks जैसे कि Facebook, Twitter इत्यादि पर share कीजिये.


 

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