Antivirus क्या हैं (What is Antivirus in Hindi) पूरी जानकारी

 

मोबाइल और कंप्यूटर का इस्तेमाल करने वाले लोगों को अक्सर यह मालूम होता है कि Antivirus क्या हैं (What is Antivirus in Hindi) और इससे क्या नुकसान हो सकता है? वायरस एक प्रकार के प्रोग्राम होते है जो किसी भी सिस्टम में घुसकर उसमे मौजूद डेटा को नष्ट कर देते है. हमारे सिस्टम में मौजूद डेटा को चोरी कर लेते है जो कि हम बिल्कुल भी नही चाहते है. इन सब से बचने के लिए एक प्रोग्राम का इस्तेमाल किया जाता है जिसे हम एंटीवायरस कहते है.

अब आप सोच रहे होंगे कि वायरस तो समझ मे आता है लेकिन ये एंटीवायरस क्या है और यह सिस्टम में मौजूद वायरस को कैसे खत्म कर देता है. जिस तरह से मनुष्य बॉडी को काम करने के लिए और स्वास्थ्य रहने के लिए एक अच्छे दिनचर्या मतलब की अच्छा भोजन, योगा, व्यायाम करने के आवश्यकता होती है ताकि शरीर मे कोई बीमारी वायरस प्रवेश ना कर सके ठीक इसी तरह से कंप्यूटर सिस्टम में मौजूद डेटा को सुरक्षित रखने के लिए एंटीवायरस बहुत ही महत्वपूर्ण होता है.

 

Antivirus क्या हैं (What is Antivirus in Hindi) पूरी जानकारी
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एंटीवायरस क्या है (What is Antivirus in Hindi)

 

Antivirus ये एक Program (code) है. यह भी बोल सकते हो ये एक ऐसा  Software है जो Computer में छुपे हुए सारे Virus Program को ढूंड निकालता है और उसको Computer से Delete यानि ख़तम कर देना. यह भी कह सकते हो ये Computer के लिए Safeguard जैसे काम करता जो Malware जैसे Computer Worms, Trojan Horse से बचाता है.

Antivirus Computer को Spyware और Adware से भी Protection देता है. इन सभी program को आपके Computer से Detect करके delete कर देते हैं. कुछ तो आपके Files को Short Cut कर देता है, Files गायब कर देता है, Antivirus क्या हैं जो computer को Slow कर देता है.

मेरा कहने का मतलब है, ये एक अच्छा वाला software उन सभी programs को निकाल देता है जो आपके computer के लिए हानी कारक होता है. अब आप ये सोच रहे है क्या Program ही virus है, हाँ virus भी एक Program ही होता है. इन दोनों को बनाने वाला भी एक इंसान ही होता है. Example:- Avira, Avast, AVG Kaspersky. तो अब जान लेते हैं ये काम कैसे करता है.

 

 

Antivirus Kya Hai

 

Antivirus एक ऐसा प्रोग्राम है जो कि कंप्यूटर में आने वाले वायरस की खोज करके उन्हें कंप्यूटर से डिलीट करता है और कंप्यूटर में आने से रोकता है। इससे हमारा कंप्यूटर और स्मार्टफ़ोन में उपलब्ध पूरा डाटा सुरक्षित रहता है। यदि आप भी अपने डिवाइस में इंटरनेट का इस्तेमाल करते है, तो उसमें वायरस का आना बहुत ही आसान होता है, क्योंकि इंटरनेट पर ऐसी बहुत सारी वेबसाइट है जो लोगों के कंप्यूटर में Virus डालने और कंप्यूटर को हैक करके उनके डाटा को चुराने या ख़राब करने का काम करती है। इन सब से बचने के लिए हम कंप्यूटर में Antivirus का इस्तेमाल करते है।

 

 

एंटीवायरस का इतिहास क्या है – History of Antivirus in Hindi?

 

आज से 70 वर्ष पूर्व पहले कंप्यूटर वायरस का जन्म हुआ तथा पहला ज्ञात कंप्यूटर वायरस क्रीपर वायरस के नाम से जाना गया उस समय मेनफ्रेम कंप्यूटर प्रचलन में थे. तो यह वायरस मेनफ्रेम कंप्यूटर सिस्टम को संक्रमित करता था. इस वायरस को हटाने के लिए अनेक शोध कार्य किये गए. Antivirus क्या हैं अंततः “रे टॉमलिंसन” द्वारा क्रीपर वायरस को नष्ट करने के लिए एक प्रोग्राम बनाया गया जिसे “द रीपर” के नाम से भी जाना जाता था. क्रीपर वायरस के बाद अनेक वायरस का जन्म हुआ तथा वर्ष 1981 में “एल्क क्लोनर” नामक ज्ञात वायरस उत्पन्न हुआ जिसने एप्प्ल कंपनी के दूसरी सीरीज के कंप्यूटर पर वायरस हमला किया.

1980 के दशक से पूर्व इंटरनेट कनेक्टिविटी सीमित थी जिस वजह से संक्रमित फ्लॉपी डिस्क के जरिए एक सिस्टम से दूसरे सिस्टम में वायरस फैलते थे. परन्तु इंटरनेट के बढ़ते विकास की वजह से वायरस ऑनलाइन तेजी से फैलने लगे. वर्ष 1987 में “एंड्रियास ल्युनिंग” तथा “काई फेज़” नामक व्यक्ति द्वारा पहला एंटीवायरस उत्पाद लॉन्च किया गया. वर्ष 1987 में ही McAfee कंपनी द्वारा Virus Scan नामक एंटीवायरस का पहला Version लॉन्च किया गया. McAfee इंटेल सुरक्षा कंपनी का एक हिस्सा थी.

समय के साथ वर्ष 1988 तक कई एंटीवायरस निर्माण करने वाली कंपनियों की संख्या में वृद्धि होती गई. वर्ष 1987 में “फ्रेड कोहन” द्वारा कहे गए कथन के अनुसार “ऐसा कोई अल्गोरिथम नहीं है जो पूर्ण रूप से संभावित कंप्यूटर वायरस की जानकारी प्रदान कर सके” परन्तु वर्तमान समय में एंटीवायरस के जरिये काफी हद तक इन गुप्त वायरस के बारे में जानकारी प्राप्त कर नष्ट किया जा सकता है.

1990 में कंप्यूटर एंटीवायरस अनुसंधान संगठन (CARO) की स्थापना की गई. 1992 में AVG तकनीक का विकास किया गया. तथा इसी वर्ष एन्टी-वायरस गार्ड अर्थात प्रचलित AVG एंटीवायरस का पहला संस्करण लॉन्च किया गया. इस प्रकार समय के साथ विभिन्न कंपनियों द्वारा एंटीवायरस प्रोग्राम के निर्माण की ओर ध्यान दिया.

 

 

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Antivirus क्या हैं पूरी जानकारी हिंदी में

 

एंटीवायरस या एंटी-वायरस सॉफ़्टवेयर, जिसे कभी-कभी एंटी-मैलवेयर सॉफ़्टवेयर के रूप में संदर्भित किया जाता है, कंप्यूटर सॉफ़्टवेयर है जिसका उपयोग मैलवेयर का पता लगाने, रोकने और हटाने के लिए किया जाता है। एंटीवायरस यह एक प्रोग्राम कोड है। आप यह भी कह सकते हैं कि यह एक ऐसा सॉफ्टवेयर है जो कंप्यूटर में छिपे हुए सभी वायरस प्रोग्राम को ढूंढता है और उसे कंप्यूटर से हटा देता है।

What is Antivirus in Hindi

यह भी कहा जा सकता है कि यह कंप्यूटर के लिए सेफगार्ड की तरह काम करता है, जो कंप्यूटर वर्म्स, ट्रोजन हॉर्स जैसे मैलवेयर से बचाता है। एंटीवायरस कंप्यूटर को स्पाईवेयर और एडवेयर से भी बचाता है। अपने कंप्यूटर से इन सभी प्रोग्रामों का पता लगाएँ और उन्हें हटाएँ। कुछ आपकी फाइलों को छोटा कर देता है, फाइलों को गायब कर देता है, जो कंप्यूटर को धीमा कर देता है।

 

Computer में एंटीवायरस सॉफ्टवेयर काम कैसे करता है

 

सबसे पहले इसको आसान सी भाषा में समझाते हैं. जैसे सबको समझ में आए वैसे simple भाषा में इसके काम को समझाना चाहूँगा. Antivirus में पहले से ही बोहत सारे Virus के Signature (छाप) या Virus Definition Files होते हैं. ये सरे Robust files हैं इन files में malware (Computer Virus) की list और उनके सम्भंदी जानकारी रहती है. इसको समझने के लिए Virus Defination को समझना होगा.

Virus Definition

Antivirus बिना virus Defination के Malware को Idendify/पहचान कर ही नहीं सकता है. इसलिए Virus Defination को Update करना पड़ता है. क्यूंकि Malware defination के अंदर Virus Signature रहता है. Internet में जो पहले से malware हैं उनके नाम और उनके संभंदी जानकारी रहती है इस Defination में.

जब भी कोई file malware से infected होती है या scan के दोरान अगर कोई malware detect होता है तो सबसे पहले Antivirus उसको Virus definition के साथ similar है या नहीं ये check करता है. Antivirus क्या हैं Virus definition कुछ malware Properties और उसके जैसे program रहते हैं. इसलिए यह भी जरुरी है की Virus Definition को Antivirus company हमेसा Update करे.

सबसे पहले यह software Computers के अंदर मोजूद सारे Files को Scan करता है. जब भी कोई file Signature(छाप) या Virus Defination Files के साथ मैच होता है. उसी समय उस फाइल को Repair या Delete कर देता है. वैसे आप जो action आप लोगे उसके उपर ही वो काम करता है. जब computer Virus Program Computer के अंदर घुस जाता है तो वो computer Files के साथ उल्टा पुल्टा काम करने लगता है.

इसी ब्यवहार से ये पता चल जाता है की कुछ गड़बड़ File Computer के अंदर है. तुरंत उसके उपर ACTION लेना सुरु हो जाता है. अब थोडा Technical तरीके से समझते हैं की कैसे Computer में Virus का पता लगाया जाता है.

Antivirus किन किन तरीकों से Malware का पता लगाता है

 

सबसे कठिन काम तो यही है की पुरे System में 500-1000 GB का DATA रहता है. और उसमे से virus को ढूंड निकलना तो चलिए जानते हैं किन किन तरीकों से ये पता लगाता है.

Signature-based detection
Heuristic-based detection
Behavioral-based detection
Sandbox detection
Data mining techniques

#1 Signature-Based Detection

ये एक सबसे पुराना तरीका है, COMPUTER Virus को ढूंड निकाल ने का. जिसमे computer में जितने भी .Exe Files हैं उन सभी को Virus Definition Files के साथ match करना पड़ता है या दुसरे malware type के साथ मैच किया जाता है. जब भी कोई unknown file को पहचान जाता है तब उसके उपर Action लिया जाता है.

इस Signature based technique में सारे प्रोग्राम को scan किया जाता हैं. इस technique में अगर कोई application download किये हो तो सबसे पहले software को Scan किया जाता है. इसके बाद Install किया जाता है. इसलिए यही सलाह है की जब भी आप कोई software को download करते हो तब उसको पहले ही scan कर लें. क्यूंकि एक बार जब आपका system Infected हो जाता है तो उसको Remove करना मुस्किल काम हो जाता है.

#2 Heuristic-Based Detection

ये detection technique को और Signature based detectction को मिलके इस्तेमाल किया जाता है. Heuristic technique को आज कल के सारे Antivirus में Use किया जाता है. virus definition file नहीं होने पे भी इस technology की मदद से आसानी से नए और पुराने Virus को भी खोज के निकला सकते है. इसके लिए latest virus definition होने की आवस्यकता नहीं.

Heuristic में ये एक संदेह जनक code या application को Virtual Environment में रन करता है और इसे ये पता लगता है की कोनसा program इस application को effect डालने की कोसिस कर रहा है. इस तरीके से दुसरे Real Software को भी बचाया जा सकता है.

#3 Behavioral-based detection

ये भी Virus को ढूंड निकालने का एक खास Detection तरीका है. जिसको Intrusion Detection Mechanism भी बोला जाता है. इसकी खासियत यह है की malaware के व्यवहार (Behavior) को detect करता है. malware को ये तभी detect करता है जब व दुसरे files को currupt या कोई उल्टा पुल्टा कम करने की कोसिस करता है. लेकिन ये खूबी दुसरे Detection में mechanism नहीं है.

#4 Sandbox Detection

लगभग Behavioral based detection mechanism पे ही ये काम करता है. इस mechanism में एक program को Virtual Environment में Run किया जाता है. अब इस process में program के Behavior को Identify किया जाता है. अगर anti virus को पता चलता है की ये program Malicius है तो उसपे action लिया जाता है.

#5 Data Mining Techniques

ये अब के समय का सबसे Latest Trending Technology है. जिसमे कुछ ख़ास Programs के Features होते हैं. data mining technique से Program Malicious है या नहीं ये पता लगाया जाता है.

Antivirus कितने प्रकार के होतें हैं?

 

अगर हम एंटीवायरस के प्रकार की बात करे तो ज्यादातर लोग तीन तरह के Antivirus का प्रयोग करते हैं जो कि उनके द्वारा प्रयोग होने वाले कंप्यूटर system की उपयोगिता या उन पर होने वाले कार्यो पर निर्भर करता हैं एंटीवायरस के प्रकार निम्नलिखित हैं:-

1- Anti-Virus: अगर आपके पास एक घरेलू कंप्यूटर हैं जिसका उपयोग आप बहुत कम करते हैं और उसपर इन्टरनेट का इस्तेमाल भी कभी कभी करते हैं Antivirus क्या हैं तो आपको साधारण Anti-Virus का use करना चाहियें यह आपके System को Security, Performance, Simple-file को सुरक्षा प्रदान करता हैं।

2- Internet Security: इसमें आपको Security, Performance, Simplicity के साथ साथ money और Privacy की भी सुरक्षा मिलती हैं अगर आप Computer पर इन्टरनेट का इस्तेमाल अधिक या रोज करते हैं और इन्टरनेट banking का use भी करते हैं तो आपको internet security anti-virus का प्रयोग करना चाहियें।

3- Total Security: क्यों की ये Total security इसलिए आपको इसमें पूरी सुरक्षा मिलती हैं इसमें आपको online और offline दोनों security मिलती हैं total security anti-virus में Security, Performance, Simplicity, Privacy PC, Mac, Mobile, password और File Protection option मिलतें हैं जिसकी सहायता से आप अपने system को fully secure कर सकते हैं।

एंटीवायरस क्यों आवश्यक है (Why antivirus is necessary)

 

दोस्तों हम में से बहुत से यूजर्स(Users) को लगता है कि हमारा कंप्यूटर तो इंटरनेट से कनेक्ट नहीं है फिर हमें एंटीवायरस की क्या आवश्यकता है? तो दोस्तों मैं आपको बताना चाहूंगा कि हम इंटरनेट के अलावा भी अपने कंप्यूटर पर बहुत से ऐसे कार्य करते हैं जिसके द्वारा वायरस आने का खतरा बना रहता है

 जैसे कि हम पेन ड्राइव या डीवीडी को अपने कंप्यूटर में इन्सर्ट (insert) करते हैं और वह पेनड्राइव या डीवीडी वायरस से इनफेक्टेड (Infected) है तो उसमें मौजूद वायरस हमारे कंप्यूटर में आ जाएंगे। आज कंप्यूटर के साथ साथ हमारे अन्य डिवाइस जैसे स्मार्टफोन या टेबलेट भी लगातार  वायरस की चपेट में आ रहे हैं।

 मैं आपको यही सुझाव दूंगा कि आप अपने कंप्यूटर में एक अच्छा सा एंटीवायरस इंस्टॉल करके रखें जिससे आपका डाटा सुरक्षित रहे। और स्मार्टफोन में कोशिश कीजिए कि जब भी आप कोई ऐप डाउनलोड करते हैं तो उसे प्ले स्टोर से ही डाउनलोड करें कोई भी अन्य थर्ड पार्टी ऐप डाउनलोड ना करें।

इस बात का खास ध्यान रखें कि यदि आप कोई ऐप डाउनलोड करते हैं तो यह जांच लीजिए कि वह आपसे कोई ऐसी परमिशन तो नहीं ले रही जिसकी उस ऐप को कोई आवश्यकता नहीं है  यदि वह ऐप कोई ऐसी परमिशन आपसे मांगती है तो सावधान हो जाइए इससे आपके डेटा को खतरा हो सकता है।

Features Of Antivirus

 

Background Scanning
Full System Scans

#1 Background Scanning

जब आप system में कुछ files, application और online कुछ करते रहते हो तब भी यह आपके सारे Files को Scan करता रहता है. Antivirus क्या हैं इसे Background Scaning कहते हैं. इसे आपके computer को Real Time Protection और Safeguard मिलता है. आपके system के उपर कोई भी Malware Attack नहीं कर सकते.

#2 Full System Scans

वैसे तो Full sacn करने की जरुरत इतनी ज्यादा नहीं है. अगर आप आप पहलीबार कोई नया Antivirus आपके System में Install कर रहे हो तब आपको एक बार Full scan करने की अबस्यकता है. इस्से आपके System मतलब Computer में जितने भी छुपे हुए computer malware हैं वो सब Remove हो जायेंगे. इसके बाद अपने आप Background Scan होता रहता है. और बिच बिच अपने Laptop को Full scan कर लेना चाहिए.

 

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Best Free Antivirus और कहाँ से खरीदें

 

मै तो सारे Antivirus को मै use नहीं किया हूँ लेकिन यहाँ पे कुछ Antivirus हैं. जिनको आप Free में 30 days के लिए या उसे भी ज्यादा दिन के लिए इस्तेमाल कर सकते हो. यहाँ पे जितने भी नाम दिए गए हैं उनको आप Online जैसे Flipkart, Amazon, snapdeel जैसे Shopping site से खरीद सकते हो.

  1. Bitdefender Antivirus Free Edition
  2. Avira
  3. Avast Free
  4. AVG Free
  5. Kaspersky Lab Internet Security 2017
  6. 360 Total Security
  7. Panda Free
  8. Comodo
  9. Check Point ZoneAlarm Free Antivirus + Firewall
  10. Microsoft Windows Defender

एंटीवायरस की विशेषताएं

 

Full System Scanning

एंटीवायरस के लिए जब भी कोई नया अपडेट आता है उस वक्त इस फीचर का उपयोग करना सबसे बेहतर है. जबकि नया अपडेट आता है तो उसमें नए वायरस को पहचानने की क्षमता होती है तो इस अपडेट को जब हम पूरे सिस्टम पर स्कैन करके अप्लाई कर देते हैं तो हमें अगर कोई वायरस हो तो पता चल जाएगा.

Virus Definition as update

यह सबसे महत्वपूर्ण फीचर है देने की जब भी कोई नया अपडेट आता है तो इससे अपडेट के रूप में लाए जाते हैं जो वायरस को परिभाषित करती हैं और एंटीवायरस प्रोग्राम को जाती है कि कौन-कौन से फाइल वायरस हो सकते है.

जब किसी नए वायरस को बनाया जाता और इंटरनेट पर चलाए जाता है तो उसके लिए नई वायरस बनाकर अपने एंटीवायरस अपडेट के रूप में भेजा जाता है. जो उसने वायरस को पहचानने में सक्षम होती है नहीं तो अगर हमारे एंटीवायरस प्रोग्राम में पुरानी डेफिनेशन में और कोई नया वायरस सिस्टम में आ चुका है तो फिर इसे नहीं पहचानता.

Background Scanning

हम अपने सिस्टम में हमेशा काम करते हैं और काम करने के दौरान अगर कोई सॉफ्टवेयर अपना काम करना शुरू कर दें और उसके लिए सेना में काम करने में दिक्कत हो तो फिर यह हमारे लिए नुकसान है.

काम करने के दौरान अगर एंटीवायरस प्रोग्राम बैकग्राउंड में चलता है Antivirus क्या हैं तो एक तरह से सिस्टम तो सुरक्षित होता ही साथ ही हमें काम करने में भी परेशानी नहीं होती.

 

Computer में Antivirus होने के फायदे

 

इसमें कोई प्रश्न ही नहीं उठता की क्या इसके कोई फायदे हैं? हाँ अभी के समय में Internet में इतना ज्यादा malware attack हो रहा है. इसलिए आपको free वाला या paid वाला दोनों में से कोई एक को जरुर अपयोग करें.

  • सबसे पहले तो ये आपके सारे डाटा को सुरक्षित रखता है.
  • computer से कोई भी आपके Data को Internet से कोई भी चुरा नहीं सकता.
  • कोई भी Software को आप बे झिजक Download कर सकते हो.
  • कोई computer virus आपके Computer को नुकसान करने से पहले ये अपना करवाई उसके उपर कर देता है.
  • अगर paid वाला हैं, तो आपके सारे Online Transaction भी सुरक्षित होंगे.
  • इस्से आपके पैसे बचेंगे क्यूंकि malware जो नुकसान होगा उन पैसे से तो आप दो तिन Antivirus खरीद लोगे.
  • आपका System कभी Hang या Slow नहीं होगा
  • System Software और Application Software बहुत Smooth Run होंगे.
  • Processing Speed बढ़ जाएगीं और कभी system crash भी नहीं होगा.
  • Hard Disk Corrupt होने को संभावना भी कम है.

 

Computer में Antivirus के फायदें और नुकसान

 

एंटीवायरस के फायदें:

  1. एंटीवायरस आपके System और Data को सुरक्षित रखता हैं
  2. Online होने वाले Malware Attact से आपके Data को चोरी होने से बचाता हैं
  3. Online malware File या Virus को Download होने से रोकता हैं
  4. Virus Infected USB या Pen Drive को पहले Scan करता हैं
  5. Banking या Online Transaction को सुरक्षित बनाता हैं
  6. System के Application और Software Smooth Run होते हैं जिससे system के Hang होने की संभावना कम होती हैं
  7. और इससे आपकी Hard Disk Corrupt होने से बचती हैं

एंटीवायरस के नुकसान:

  1. एंटीवायरस के लिए आपको हर साल पैसे खर्च करने पडतें हैं
  2. Anti-virus होने से system की Speed कम हो जाती हैं
  3. इसके लिए आपके पास internet data pack होना जरुरी हैं
  4. Virus infected file repair न होने पर पूरी file को delete कर डाटा हैं
  5. अगर Antivirus को update नहीं किया तो ये सही से कम नहीं करता हैं

 

 

 

Conclusion

 

 

मुझे उम्मीद है की आपको मेरी यह लेख  Antivirus क्या हैं (What is Antivirus in Hindi) पूरी जानकारी जरुर पसंद आई होगी. मेरी हमेशा से यही कोशिश रहती है की readers को पूरी जानकारी प्रदान की जाये जिससे उन्हें किसी दुसरे sites या internet में उस article के सन्दर्भ में खोजने की जरुरत ही नहीं है. इससे उनकी समय की बचत भी होगी और एक ही जगह में उन्हें सभी information भी मिल जायेंगे.

यदि आपके मन में इस article को लेकर कोई भी doubts हैं या आप चाहते हैं की इसमें कुछ सुधार होनी चाहिए, तब इसके लिए आप नीचे comments लिख सकते हैं.यदि आपको यह लेख पसंद आया या कुछ सीखने को मिला तब कृपया इस पोस्ट को Social Networks जैसे कि Facebook, Twitter इत्यादि पर share कीजिये.


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