डिमांड ड्राफ्ट (DD) क्या है DD कैसे बनता है? पूरी जानकारी

वर्तमान युग में किसी को पेमेंट करना बहुत ही आसान है। डिमांड ड्राफ्ट (DD) क्या है मगर, इस से पहले के समय में किसी को पैसा भेजना यानि कि पेमेंट करना बोहोत ही कठिन था। और, पेमेंट करने का उपाय भी बोहोत कम था। मगर, आज के डिजिटल युग में बोहोत सारे पेमेंट मेथड का प्रचलन रहेने की वजह से किसी को फंड ट्रांसफर करना बोहोत आसान हो गया है। और, ऐसे कुछ महत्वपूर्ण पेमेंट मेथड है RTGS, NEFT, UPI, IMPS आदि और, इन सारे प्रक्रियाओं के अलावा भी फंड ट्रांसफर के और एक अनोखा प्रक्रिया है मोबाइल बैंकिंग।

और, इन सारे प्रक्रिया के तहत money transfer करने के लिए बैंक जाने की कोई ज़रूरत नहीं होती है। घर बैठे ही ऑनलाइन के माध्यम से पैसे ट्रांसफर किया जा सकता है। और, इस प्रक्रिया को net banking कहते है। इस net banking के ज़माने में भी पैसा भेजने का पुराना एक मेथड का प्रचलन है और यह है DD। यह DD का मतलब है डिमांड ड्राफ्ट। यह है एक negotiable instrument।

साधारण रूप में कॉलेज में फीस जमा देने के विषय में, सरकारि संगस्था, ऑफिस में, इसके अलावा किसी भी बड़ी अमाउंट की खरीदारी में पेमेंट करने के लिए यह डिमांड ड्राफ्ट का इस्तेमाल होता है। तो क्या आप DD के विषय में विस्तार से जानते है। क्या आप जानते है डिमांड ड्राफ्ट (DD) क्या है? DD की फुल फॉर्म। डिमांड ड्राफ्ट कैसे बनाए। चेक और डीडी में क्या फर्क ह। DD के फायदे नुकसान आदि। यदि नहीं तो यह पोस्ट आप सभी के लिए बोहोत उपियोगि होने वाला है।

 

 

डिमांड ड्राफ्ट (DD) क्या है DD कैसे बनता है? पूरी जानकारी
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डिमांड ड्राफ्ट क्या है? What is Demand Draft DD?

डिमांड ड्राफ्ट एक तरह का Negotiable instrument है, जोकि बैंको के द्वारा पैसे लेकर एक ड्राफ्ट बनाया जाता है। ये डिमांड ड्राफ्ट, ड्राफ्ट बनवाने वाला भुगतान की जगह पर दे देता है।

और पढ़ें – गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स – जी एस टी के फायदे और नुकसान Advantages Disadvantages of GST in हिंदी ये ड्राफ्ट संस्था द्वारा लिए जाने के बाद बैंक में जमा किया जाता है और फिर बैंक के द्वारा पैसे संस्था के बैंक अकाउंट में आ जाते है। किसी भी ड्राफ्ट की बैधता चेक की तरह ही तीन महीने ही होती है। अगर लाभार्थी ड्राफ्ट को तीन महीने के बाद जमा करता है तो वो मान्य नही होगा।

 

डी डी क्या होता है ?

 

DEMAND DRAFT KYA HOTA HAI PURI JAANKARI HINDI ME

डिमांड ड्राफ्ट (demand draft) जिसे हम dd भी कहते है किसी भी बैंक खाते में पैसे भेजने का सबसे सुरक्षित और पुराना तरीका है. आज कल ऑनलाइन बैंकिंग , मोबाइल बैंकिंग , NEFT , RTGS जैसे माध्यमो के आ जाने से भी इसकी उपयोगिता ख़त्म नहीं हुई है. उदहारण के लिए आज भी जब आप अपने कॉलेज की फीस जमा करने जाते है तो अधिकतर संसथान संस्था के नाम से जारी डिमांड ड्राफ्ट के माध्यम से ही फीस लेते है.

 

DD की फूलफॉर्म

अब तक इस पोस्ट के द्वारा DD क्या है के विषय में आपने जानकारी प्राप्त किया है। अब DD है शॉर्ट फॉर्म इसकी फुलफॉर्म के बारे में बता दें। DD की फूल फॉर्म है Demand Draft (डिमांड ड्राफ्ट), इस प्रक्रिया में बैंक में शुल्क देना पड़ता है, जिसके बदले में बैंक यह ड्राफ्ट तैयार कर देता है।

और, इसे बनवाने वाला ब्यक्ति या संगस्था भुगतान के जगह पर इसे जमा कर देता है। लाभार्थी द्वारा निर्धारित बैंक ब्रांच में ही इसे जमा करना पड़ता है। इसमें लाभार्थी को डिमांड ड्राफ्ट द्वारा पेमेंट करने के बाद, यह पेमेंट किया गया का पैसा उसे निर्धारित बैंक ब्रांच में जाके विथड्रॉ करना होता है।

 

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डिमांड ड्राफ्ट कैसे बनता है ?

 

डिमांड ड्राफ्ट देखने में लगभग बैंक चेक की तरह ही होता है. डिमांड ड्राफ्ट बनवाने के लिए आपको अपने बैंक जाकर DD का फॉर्म भरकर जमा करना होता है और कुछ देर बाद बैंक आपको डिमांड ड्राफ्ट प्रिंट करके दे देता है. DD के फॉर्म में आपको जिस व्यक्ति या संस्था के नाम से ड्राफ्ट बनवाना वो भरना होता है और कितने पैसे की बनवानी है वो रकम भरनी होती है.

डिमांड ड्राफ्ट बनवाने का बैंक आपसे कुछ सर्विस चार्ज या कमीशन भी लेता है जो आप कितने का ड्राफ्ट बनवा रहे है उस पर निर्भर करता है. यदि आप ५०००० से ज्यादा का ड्राफ्ट बनवाते है तो आपको पैन नंबर भी देना होगा . डिमांड ड्राफ्ट (DD) क्या हैयदि आपका बैंक में सेविंग अकाउंट है तो ड्राफ्ट का पैसा उसी से कट जाता है लेकिन यदि आपका बैंक में अकाउंट नहीं है तोह भी आप नकद रूपए जमा कराकर डिमांड ड्राफ्ट बनवा सकते है.

 

डिमांड ड्राफ्ट कैसे काम करता है ?

जब हम किसी व्यक्ति आ संस्था के नाम से जारी हुए डिमांड ड्राफ्ट को उसके पास जमा करते फिर वो व्यक्ति उसे अपने बैंक में जमा करता है और हमारे बैंक द्वारा यानी ड्राफ्ट जारीकर्ता बैंक के द्वारा उस बेनेफ़िसिअरी के खाते में रकम भेज दी जाती है.

डिमांड ड्राफ्ट जारी करने की तारीख से छ महीने तक वालिद होता है. DD के निचे कुछ नंबर लिखे होते है जिन्हें DD number कहते है. डिमांड ड्राफ्ट को जमा करने से पहले dd नंबर को लिख कर रख लेना चाहिए क्यों की यदि आपका ड्राफ्ट खो जाए या बेनेफिसिअरी के अकाउंट में पैसे ना पहुचे तो ये नंबर किसी भी प्रकार की धोकाधड़ी होने पर काम आ सकता है. dd नंबर कहा पर होता है वो आप तस्वीर में भी देख सकते है.

 

डिमांड ड्राफ्ट बनवाने का तरीका क्या है? How to make Demand Draft?

डिमांड ड्राफ्ट को अगर हम आसन भाषा में समझे तो अगर आप को किसी संस्था की फीस जमा करनी है या और किसी जगह पर भुगतान करना चाहते है तो आप डिमांड ड्राफ्ट का उपयोग कर सकते है।

ये देखने में चेक की तरह ही होता है लेकिन इसमें कुछ बदलवा होते है। डिमांड ड्राफ्ट बनवाने के लिए हमें अपने बैंक में जाना होता है और वहां उनसे DD के बारे में कहना है, बैंक कर्मचारी आपको DD का फार्म देंगे और आपको उसमे अपने बैंक का जानकारी भरना होगा।

DD वाला फार्म भर कर जमा कर देने पर बैंक कर्मचारी आपको आपके अनुसार जितने पैसे का DD बनवाना है उतना पैसा जमा कर देंगे औए वो लोग आप को डिमांड ड्राफ्ट प्रिंट करके दे देंगे। डिमांड ड्राफ्ट (DD) क्या है आप उस DD को उसी व्यक्ति को दे सकते हैं जिसका नाम आपने उसमे लिखवाया हो।

 

डिमांड ड्राफ्ट बनवाने के लिए मुख्य निर्देश Main instructions for making demand draft

डिमांड ड्राफ्ट बनवाने के लिए कुछ मुख्य नियम –

अपने बैंक में डिमांड ड्राफ्ट बनवाने के लिए पहले वहां से डिमांड ड्राफ्ट का फॉर्म ले और फिर उसमे अपने अपने detail को भर ले।
आप को जितने रूपये का ड्राफ्ट बनवाना है आपको उतने रूपये बैंक को कैश देने होंगे और साथ में कुछ फीस भी देना होगा।
यदि आप को 50000 से ज्यादा रूपये का ड्राफ्ट बनवाना है तो आपको अपना PAN कार्ड दिखाना और उसकी एक कॉपी जमा करना होता है।
ड्राफ्ट बनवाने बैंक अपना शुल्क ले लेती है फिर आप को ड्राफ्ट प्रदान करती है।
DD फॉर्म को जब आप जमा करने के कुछ ही समय पश्चात् बैंक वाले आपको डिमांड ड्राफ्ट प्रदान कर देंगे, और आप उसे अपने भुगतान के लिए उपयोग कर सकते है।

डिमांड ड्राफ्ट का शुल्क Demand Draft Fees

बैंक इस सुविधा को प्रदान करने के लिए अतिरिक्त शुल्क लेती है। सन 2007 में भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने इस सुविधा के लिए एक शुल्क निर्धारित तय था लेकिन समय समय पर इसका शुल्क बदलता रहता है। डिमांड ड्राफ्ट बनवाने का अलग अलग बैंको में अलग अलग शुल्क है।

डिमांड ड्राफ्ट की वैधता Demand Draft Validity

डिमांड ड्राफ्ट की वैधता चेक की तरह ही तीन महीने ही होता है और अगर लाभार्थी ड्राफ्ट को तीन महीने के बाद जमा करता है तो वो मान्य नही होगा। इस स्थिति में बैंक ड्राफ्ट को पुनः वैध कारने के लिए कहती है। इसके लिए आप को फिर से बैंक में जाना होगा और ड्राफ्ट को पुनः वैधता करवाना होगा।

ड्राफ्ट को रद्द करवाने का तरीका How to cancel demand draft?

ड्राफ्ट को रद्द करवाने के लिए आपको अपने बैंक में जाना होगा और उसे रद्द करवाने के लिए एक प्राथर्ना पत्र लिखना होगा। बैंक ड्राफ्ट को रद्द करने के लिए फिर से अपना कुछ शुल्क लेगी और उस ड्राफ्ट को रद्द कर देगी।

किसी ड्राफ्ट को रद्द करवाने के बाद लगभग 10 दिन के बाद आप का पैसा आपके अकाउंट में आ जायेगा। बहुत से बैंको में जब आप के ड्राफ्ट की विधता ख़त्म हो जाती है तो पैसे अपने आप ही आप के खाते में आ जाते है।

 

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डिमांड ड्राफ्ट क्‍यों है खास ?

जानकारी के ल‍िए बता दें कि अगर चेक अकाउंट पेई नहीं है और यह खो जाता है तो उसका गलत इस्‍तेमाल होने के चांस रहते हैं। कोई भी व्‍यक्ति बीयरर बनकर उसे इनकैश करा सकता है। लेकिन डीडी के साथ ऐसा नहीं है। इसके द्वारा केवल बैंक अकाउंट में ही पेमेंट होता है, इसलिए इसके खो जाने पर इसे इनकैश नहीं कराया जा सकता। वहीं खो जाने की स्थिति में इसे कैंसिल कराया जा सकता है। मालूम हो कि रिजर्व बैंक के नियम के मुताबिक, डीडी पर बायर का नाम प्रिंट होना अनिवार्य है।
यह नियम 15 सितंबर 2018 से प्रभाव में आया है ताकि मनी लॉन्ड्रिंग की कोशिशों को नाकाम किया जा सके।

जिसके नाम पर डीडी पेएबल है, उसे डीडी का अमाउंट बैंक अकाउंट से इनकैश कराने के लिए डीडी बनवाए जाने का कारण बताना होगा। इसका मतलब किस काम के लिए अमाउंट डीडी से ट्रांसफर किया जा रहा है, उससे संबंधित डॉक्‍युमेंट्स बैंक में दिखाने होंगे। तभी डीडी इनकैश होगा।
बैंक डीडी बड़े और इंटरनेशनल ट्रांजेक्‍शन के लिए एक अच्‍छा जरिया हैं। ज्‍यादातर एजुकेशनल इंस्‍टीट्यूट्स और कई जॉब्‍स के लिए फीस ट्रांसफर के माध्यम के तौर पर डीडी का ही इस्‍तेमाल होता है। डीडी को रुपये के अलावा जरूरत पड़ने पर दुनिया की किसी भी करेंसी में बनवाया जा सकता है।

Demand Draft Or Cheque Me Antar In Hindi.

डिमांड ड्राफ्ट और चेक में समानता सिर्फ एक चीज में ही है कि दोनों काजग का एक पन्ना है और दोनों को भरकर बैंक को देना है। पर इसके अलावा कुछ ऐसे कारणों से अलग है जो निम्नलिखित है।

  • – Cheque का उपयोग करने के लिए आपका उसी बैंक में एकाउंट होना जरूरी है। पर Demand Draft यानी कि DD के लिए आपका उस बैंक में एकाउंट होना जरूरी नही है।
  • – Cheque के द्वारा व्यक्ति पैसा ले सकता है, पैसे जमा नही कर सकता जबकि डिमांड ड्राफ्ट से व्यक्ति को DD के साथ पैसे बैंक में देने होते है।
  • – Cheque द्वारा पैसे Bank Account से Bank Account में ट्रांसफर हो जाते है जबकि DD में पैसे व्यक्ति से एकाउंट में नकद ट्रांसफर होते है।
  • – अक्सर देखा गया है कि Cheque देने पर वह Cheque बाउंस हो जाता है। पर डिमांड ड्राफ्ट में ऐसा बिलकुल नही होता क्योंकि पैसे Demand Draft के साथ ही नकद ले लिए जाते है।
  • – Cheque कभी कभी मुसीबत भी साबित हो जाता है जब यह गुम या गिर जाये। तब आपके Bank Account से पैसे निकल सकते है। पर डिमांड ड्राफ्ट में इस प्रकार की कोई परेशानी का सामना नही करना पड़ता।
  • – डिमांड ड्राफ्ट का भुगतान आप Cheque से कर सकता है पर Cheque का भुगतान डिमांड ड्राफ्ट द्वारा सम्भव नही है।
  • तो आप ऊपर बताये कुछ कारणों से यह जान चुके होंगे कि Cheque के मुकाबले Demand Draft की खासियत क्या है और चेक के मुकाबले कितना सुरक्षित है।

डिमांड ड्राफ्ट की कुछ प्रमुख बातें Some Important things about Demand Draft

डिमांड ड्राफ्ट बनवाने के लिए बैंक अकाउंट होना जरुरी नही है आप किसी भी बैंक से डिमांड ड्राफ्ट बनवा सकते है।
50000 से ज्यादा के ड्राफ्ट बनवाने के लिए PAN कार्ड जमा करना होता है।
डिमांड ड्राफ्ट को चेक से कम्पेयर कर सकते है लेकिन डिमांड ड्राफ्ट कुछ मामलो में चेक से अलग होता है।
DD को Crossed Demand Draft भी कहते है।

 

DD बनवाने का ऑफलाइन तरीका :

यह तरीका वैसे तो बहुत आसान है परंतु के लोग इससे अनजान है इसलिए आइये हम जानते है How To Make Offline Demand Draft In Hindi.

स्टेप 1: सबसे पहले आप बैंक में जाये और डिमांड ड्राफ्ट भरने की पर्ची हासिल करें।

स्टेप 2: पर्ची पर उस विभाग या संस्थान का नाम, पता सही से लिखे, यह भी लिखे की आप यहाँ कितनी राशि देना चाहते है, आप इस राशि को अंक और शब्दों में सही से लिखे।

स्टेप 3: इतना करने के बाद बैंक कैशियर के पास जाए और पर्ची और उतने पैसे तथा अन्य बैंक चार्ज जमा करदे।

( अगर आपका उस बैंक में एकाउंट है तो आप cheque का भी प्रयोग कर सकते है अन्यथा नकद राशि दे। )

स्टेप 4: अब कैशियर वह पैसे लेकर आपको Demand Draft ( DD ) बनाकर आपको दे देता है जिसमे दो हिस्से होते है।

एक हिस्सा आपको आवेदन भेजते वक्त जोड़कर देना होता है जबकि दूसरा हिस्सा आप रसीद के तौर पर अपने पास रख सकते है।

 

DD बनवाने का ऑनलाइन तरीका :

आभी आपने जाना Demand Draft Kya Hai ?, और इसके संबधित जानकारी को समझा आइये अब यह समझते है Online DD Kaise Banaye ?

आज कल आप ऑनलाइन माध्यम द्वारा भी डिमांड ड्राफ्ट को ऑनलाइन भी बनवा सकते है जैसे ऑफलाइन प्रोसेस है वैसे ही ऑनलाईन प्रोसेस होती है पर आपको इसके लिए बैंक में जाने की कोई जरूरत नही होती आप घरबैठे DD बनवा सकते है आइये समझे यह प्रोसेस। ( How To Make Demand Draft In Hindi )

Note: Online Demand Draft बनाने के लिए आपके पास इंटरनेट बैंकिंग होना आवश्यक है।ज्यादातर सभी के पास SBI Bank Account है इस लिए हम इसी बैंक का ही उदाहरण देंगे।

स्टेप 1: सबसे पहले आपको अपने इंटरनेट बैंकिंग में दाखिल होना होगा।

स्टेप 2: जब यहाँ आप दाखिल हो जाते है तो आप यहाँ से Payment कर सकते है इसके लिए आप Payment/Transfer पर क्लिक करे।

स्टेप 3: इस विकल्प में ही आपको अलग अलग तरीक़े दिखेंगे जिससे आप पेमेंट कर सको। यहाँ Issue डिमांड ड्राफ्ट का विकल्प नजर आएगा आपको यहाँ पर क्लिक करना है।

स्टेप 4: जैसे ही आप यहाँ पर क्लिक करते है एक नया पेज ओपन होगा जहां

से आप डिमांड ड्राफ्ट बनवा सकते है।

स्टेप 5: पर आपको इससे पहले अपना Profile Password देना होगा। Profile Password देना होगा।

स्टेप 6: अब आप डिमांड ड्राफ्ट बनवाने के लिए पेज पर आ चुके होंगे।

स्टेप 7: यहाँ आपको सबसे पहले DD बनाने की लिमिट देख ले अगर कम है तो आप Change Limit पर क्लिक करना होगा।

स्टेप 8: आपको फिर से Profile Password देकर Submit पर क्लिक करना होगा।

स्टेप 9: आप दिन की लिमिट सेट करले और सबमिट बटन पर क्लिक करे ( आप 1 दिन का ज्यादा से ज्यादा 500000 ( 5 लाख ) तक का डिमांड इश्यू कर सकते है।

स्टेप 10: फिर से आप डिमांड ड्राफ्ट के पेज पर पहोच जायेंगे। यहां चुने।

– अपना बैंक एकाउंट (अगर एक से ज्यादा है तो)
– कितना पैसा DD बनाने के लिए दे रहे है।
– जिसको आप DD Ishue करना चाहते है उसका नाम।
– चयन करें कि DD Issue करने का उद्देश्य क्या है।
– बैंक ब्रांच कॉड दे जहाँ पर आप पैसे दे रहे है।
– बैंक ब्रांच कॉड दे जहाँ आपको पैसे जमा करने है।
– अब नीचे की ओर आपको Collecting Personal और Courier इन 2 विकल्प के से कोई एक चुनना होगा, Submit बटन पर क्लिक करना है।
( Collecting Personal में आपको खुद बैंक में जाकर DD प्राप्त करना है जबकि Courier में आप By Post DD अपने घर मंगवा सकते है, जहाँ बैंक एकाउंट का पता ही मान्य होगा । पर इसके लिए आपको 50/- रुपये का अतिरिक्त चार्ज देना होगा।)

स्टेप 11 : Submit पर क्लिक करने पर आपके द्वारा भरी गयी सभी जानकारी एकबार फिर आपके सामने होगी। जिसमें बैंक चार्ज भी होगा। एकबार वेरीफाई कर आप Confirm बटन पर क्लिक करे।

स्टेप 12: Confirm पर क्लिक करने पर बैंक द्वारा रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर पर एक OTP आयेगा जिसे आपको दिए गए बॉक्स में दे और नीचे दिए गए Confirm बटन पर क्लिक करे।

स्टेप 13 : इतना करने पर आपके द्वारा Issue किया गया डिमांड ड्राफ्ट बन जाता है।

जाने : ऑनलाइन SBI बैंक एकाउंट कैसे बनाये ?

नोट- इतना करने पर ध्यान रहे कि अगर आपने Collecting Personal का विकल्प चुना है तो आपकोस स्लिप लेकर बैंक में जाना है स्लिप दिखानी है और DD प्राप्त करना हैं मगर Courier वाले विकल्प में आप पोस्ट द्वारा घर मंगवा सकते है।

 

DD के फायदा

डिमांड ड्राफ्ट के कुछ महत्वपूर्ण फायदा है

  • डीडी का सबसे महत्वपूर्ण सुविधा है फंड स्थानांतरण की सुविधा। जिसके विषय में हम पहले से ही बर्णना किए है। यह डीडी एक व्यक्ति को एक अकाउंट से दूसरे बैंक अकाउंट में आसानी से फंड ट्रांसफर करने में सुविधा देती है।
  • डिमांड ड्राफ्ट के माध्यम से पैसा भेजना बोहोत ही सुरक्षित है और इस माध्यम के अन्तर्गत पैसा भेजना भी guaranteed है।
  • डिमांड ड्राफ्ट के द्वारा किसी भी बड़े कीमत की खरीदारी किया जा सकता है।
    DD को बनवाना बोहोत आसान है। और, डीडी को सिर्फ रुपया में ही नहीं पल्की ज़रूरत के हिसाब से किसी भी देश की करेंसी में परिवर्तन किया जा सकता है।

 

DD के नुक़सान

अब तक इस पोस्ट में डिमांड ड्राफ्ट के सुविधाओं के विषय में आपने पड़ा। मगर, यह डीडी का कुछ नुक़सान भी है। जैसे,

डिमांड ड्राफ्ट का एक बड़ा नुकसान यह है कि यदि यह डिमांड ड्राफ्ट खो जाता है, चोरी हो जाता है, या बदल जाता है, और राशि गलत व्यक्ति के पास चला जाता है, तब बैंक खोए हुए राशि को बदलने के लिए जिम्मेदार नहीं होता है। और, ऐसे मामलों में बहुत सारा पैसा खो जाने का डर भी रहेता है, खासकर जब से बैंक ड्राफ्ट आमतौर पर बड़ी खरीदारी के लिए उपयोग किए जाने लगे है।

 

डीडी से संबंधित अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न उत्तर-

1. Negotiable Instrument क्या है?

नेगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट है कुछ विशिष्ट तरह का दस्तावेज जो Business और financial transaction से संबंधित होता है।

2. डिमांड ड्राफ्ट कितने प्रकार के होते है?

डिमांड ड्राफ्ट दोनों प्रकार के होते है जैसे एक है साइट डीडी और, दूसरा है टाइम डीडी।
यह, साइट डीडी है एक ऐसा डिमांड ड्राफ्ट जो जरूरी दस्तावेजों के वेरिफिकेशन के बाद पेश किया जाता है। अगर, सभी जरूरी दस्तावेजों को पेश नहीं किया जाए तब, प्राप्तकर्ता पैसों को प्राप्त करने में सक्षम नहीं होगा।

यह, टाइम डीडी यानिकि Time Demand Draft है समय डिमांड ड्राफ्ट यानिकि यह समय का एक निर्धारित अवधि से पहले या बाद में दिया जा सकता है। यह बैंक से नहीं लिया जाता है।

 

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Conclusion

 

 

मुझे उम्मीद है की आपको मेरी यह लेख डिमांड ड्राफ्ट (DD) क्या है DD कैसे बनता है? पूरी जानकारी जरुर पसंद आई होगी. मेरी हमेशा से यही कोशिश रहती है की readers को पूरी जानकारी प्रदान की जाये जिससे उन्हें किसी दुसरे sites या internet में उस article के सन्दर्भ में खोजने की जरुरत ही नहीं है. इससे उनकी समय की बचत भी होगी और एक ही जगह में उन्हें सभी information भी मिल जायेंगे.

यदि आपके मन में इस article को लेकर कोई भी doubts हैं या आप चाहते हैं की इसमें कुछ सुधार होनी चाहिए, तब इसके लिए आप नीचे comments लिख सकते हैं.यदि आपको यह लेख पसंद आया या कुछ सीखने को मिला तब कृपया इस पोस्ट को Social Networks जैसे कि Facebook, Twitter इत्यादि पर share कीजिये.


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