Projector क्या है? इसके प्रकार और उपयोग की पूरी जानकारी (2022)

Friends क्या आप जानते है की Projector क्या है? (What is Projector in Hindi) और यह कैसे काम करता है? अगर आपको यह नहीं मालूम की प्रोजेक्टर क्या है और यह कैसे काम करता है, तो कोई बात नहीं. क्योकि इस article में हम आपको projector से related सभी तरह की जानकारी hindi में देने की कोशिश करेंगे. आप में से ज्यादातर लोगो ने projector को कभी न कभी देखा होगा और शायद कभी use भी करने का मौका मिला होगा. लेकिन क्या आपको सच में मालूम है की आखिर एक projector होता क्या है और यह किस तरह के काम के लिए use किया जाता है.

शुरुआत में इन projectors का use सिर्फ कुछ ही fields में और कुछ ही लोगो के द्वारा किया जाता था. लेकिन वर्तमान में इन विडियो projector का use इतना ज्यादा बढ़ गया है की अब यह आपको अक्सर school, colleges, university, organization में देखने को मिल जाता है. यहाँ तक की इन video projector का use इस हद तक बढ़ चूका है की आजकल लोग शादियों में videos या photos को show करने के लिए इनका use करने लगे है. ताकि वह कुछ यादगार पलों को अपने दोस्तों और रिश्तेदारों के साथ एक बार फिर से याद कर सके.

इस आर्टिकल में आप जानेंगे की एक projector क्या होता है, यह कैसे काम करता है और यह कितने प्रकार के होते है. इसके अलावा भी आप इस article में projector से related दूसरी बातों के बारे में भी जानेंगे. मुझे अच्छे से याद है की जब मैं 12th में गया तब हमारे school में projector के माध्यम से पढाना शुरू कर दिया गया था. आज कल ज्यादातर schools, colleges और university कुछ specific subjects या topics के बारे में projector का use करके पढाना शुरू कर दिया गया है. तो आइये जानते है की projector क्या होता है और यह कैसे काम करता है.

 

Projector क्या है? इसके प्रकार और उपयोग की पूरी जानकारी (2022)
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Contents

Projector क्या है? (What is Projector in Hindi)

 

Projector को आसान भाषा में बताएं तब यह एक ऐसा device होता है जिसमें की एक series of chips, lenses, color wheels और various दुसरे gadgets और gizmos का इस्तमाल होता है जो की एक beam of light को ग्रहण करता है और उसे बदल देता है आपके favorite movies और TV shows में वो भी बढ़िया high definition detail के साथ.

एक प्रोजेक्टर ऐसा optical device होता है जो की एक image या moving images को project करता है एक surface के ऊपर, जो की मुख्य रूप से एक projection screen होता है. आज के समय में जो सबसे common type की projector होती है वो है विडियो प्रोजेक्टर. Video projectors को हम कह सकते हैं digital replacements पहले प्रकार के projectors के जैसे की slide projectors और overhead projectors.

Projectors का invention Charles Francis Jenkins ने सन 1894 में किया था. आजकल के projectors में और पुराने projectors में कुछ भी समानता नहीं हैं. जहाँ पहले के original models में celluloid film के द्वारा light को blast किया जाता था और इसमें images और sounds को एक साथ string किया जाता था कुछ ऐसे techniques का इस्तमाल कर जिनका अभी और इस्तमाल भी नहीं होता है.

Modern projectors के design और implementation दोनों में बहुत complexiety होती है, इसमें बहुत से अलग अलग core technologies का इस्तमाल किया जाता है जो की एक prospective buyer को काफी बड़ा range प्रदान करता है.

 

प्रोजेक्टर का इतिहास (History of Projector in Hindi)

 

पहले प्रोजेक्टर का आविष्कार कब किया गया था?

पहला कैरोसेल स्लाइड प्रोजेक्टर 11 मई, 1 9 65 को डेविड हैंनसेन नामक एक व्यक्ति द्वारा पेटेंट किया गया था। आज हम जानते हैं कि डिजिटल प्रोजेक्टर जीन डॉल्गॉफ द्वारा 1984 में बनाया गया था, हालांकि वह 1968 में इसके लिए अवधारणा के साथ आया था।

 

 

प्रोजेक्टर के प्रकार (type of projector)

 

Projectors के कई प्रकार होते हैं लेकिन उनमें से तीन सबसे ज्यादा मुख्य होते हैं.

1. DLP
2. LCD
3. CRT

 

DLP Projection क्या है (What is DLP Projection)

 

DLP technology based होती है एक optical semiconductor के ऊपर जिसे की एक DMD chip (Digital Micro mirror Device) कहा जाता है, इसे सन 1987 में Texas Instruments ने किया था. एक DMD Chip कई millions tiny mirrors से बने हुए होते हैं, जो की rotage करते हैं 10 degrees angle में (बेहतर models में ये 12 Degree भी होते हैं).

एक DMD chips में, shade अक्सर extra होती हैं और इन्हें control किया जाता है एक shade controls के इस्तमाल से. ये ऐसे controls होते हैं जिसमें की ये rotates करती हैं पूरी round होकर जो की करीब 150x each second से लेकर 250x तक हो सकता है या इससे भी ज्यादा हो सकता है.

बहुत सारे affordable products को बनाया जा सकता है several message shade controls के इस्तमाल से. ये या तो Red/Green/Blue कोई भी colour हो सकता है, लेकिन अक्सर ये एक clear message होता है.

 

DLP Projector के लाभ क्या है (What are the Advantages of DLP Projector)

 

1) इसमें Filter-free design होती हैं.
2) ये Sealed projection system होते हैं.
3) इसमें failed air filter के कोई problems नहीं होते हैं.
4) Higher contrast होते हैं.
5) Less pixilation होती हैं
6) Lighter और smaller होते हैं.

 

DLP Projector के हानि क्या है (What are the disadvantages of DLP Projector)

 

इसमें Rainbow effect दिख सकता है, Color wheels कभी कबार rainbow effect produce करते हैं. Rainbow effect (इसे color separation artifacts भी कहा जाता है), ये momentary flashes of banded color होते हैं जो की पूरी तरह से rainbows (इन्द्रधनुष) के तरह ही दीखते हैं. ये randomly occur होते हैं, और ये केवल कुछ पलों के लिए रहते हैं.

ये problem ज्यादातर slower color wheel projectors में दिखाई देते हैं. ये rainbow artifacts problem कभी भी 3-DLP chip projectors में दिखाई नहीं पड़ते हैं क्यूंकि इसमें 3 single DLP chips technology का इस्तमाल होता है.

 

एलसीडी प्रोजेक्टर क्या है (what is lcd projector)

 

LCD projector एक ऐसा type का video projector होता है जिसका इस्तमाल displaying video, images और computer data को screen में या दुसरे flat surface में show करने के लिए इस्तमाल किया जाता है. ये slide projector या overhead projector का modern version होता है. Images display करने के लिए, LCD (liquid crystal display) projectors typically light को send करते हैं एक metal-halide lamp से एक prism के द्वारा या एक series की dichroic filters से जो की उस light को separate कर देती है तीन polysilicon panels में – जिसमें एक red के लिए, दूसरा green के लिए और तीसरा blue components के लिए video signal का.

क्यों की polarized light pass हो जाता है इन panels (जो की combination होता है polarizer, LCD panel और analyzer का) के द्वारा, individual pixels को open किया जा सकता है light को allow करने के लिए या close light को block करने के लिए. ये open और closed pixels की combination एक wide range की colors और shades को पैदा कर सकती है projected image में.

 

LCD Projectors के Advantages क्या है

 

1. Higher contrast ratio होता है specific projector models में.
2. Sharper image होता है specific projector models में.

 

LCD Projectors के Disadvantages क्या है

 

1. Low contrast ratio का होना, equipment के design से, जिसमें उन्हें high-quality optics से equip किया गया होता है.

2. High-weight होते हैं.

3. Dust blobs Impurities होते हैं panels में. इसलिए LCD structure projector को प्रत्येक 300 घंटों के इस्तमाल होने के बाद जरुर से साफ करना चाहिए.

4. Color decay होता है.

5. इसमें Limited lifetime Screen-door effect दिखाई पड़ता है, ये तब होता है जब pixels के बीच की lines visible बन जाती है, जिसके कारन separate pixels visible होने लगते हैं, और ये effect ज्यादा distracting बन जाते हैं.

6. इसमें Dust issues बहुत ज्यादा होती है. इस dust accumulation के होने से contrast ratio में करीब 50% तक की over time में कमी देखने को मिल सकती है.

7. Dead pixels का होना. जो की आपने जरुर सुना होगा LCD Monitors में.

 

CRT Projector क्या है (What is CRT Projector)

 

CRT का Full Form होता है “Cathode Ray Tube“. ये सबसे ज्यादा बड़ा और ज्यादा इस्तमाल किया जाने वाला projector होता है. आप लोगों में बहुतों ने इस projector को school के auditorium में, या Bars में जरुर देखा होगा. CRT utilizes करते हैं three tubes की, जिसे की “guns” भी कहा जाता है. ये तीन colors combine और converge होकर image बनाते हैं.

CRTs में fixed number की pixels नहीं होती हैं, जो की उन्हें एक versatile machines बनाता है और जो capable होते हैं clear images बनाने के लिए higher से lower resolution sources में. CRTs को चलाने के लिए periodic ‘calibration’ की जरुरत होती है एक trained professional की, जो की एक additional expense होता है end user के लिए. इन projectors को generally इनके size के कारण ही fixed installations किया जाता है. CRTs ज्यादा bright नहीं होते हैं दुसरे technologies के जैसे, लेकिन जो refined picture quality एक properly calibrated CRT प्रदान करता है उसे beat करना बहुत ही मुस्किल बात है. वहीँ इसके parts ज्यादा costly, खासकर वो guns को replace करने में काफी पैसा खर्चा करना पड़ता है.

 

 

 

प्रोजेक्टर का Throw Distance क्या है? (What is the Throw Distance of the Projector)

 

एक projector की throw distance उस distance को कहा जाता है जो को projector और Screen के image के भीतर होती है (यानि की वो distance जितनी दूर तक image को “thrown” किया जा सकता है).

 

Projection Screen क्या होते है?

 

एक projection screen उसे कहते हैं जहाँ पर installation में एक surface और एक support structure होता है और जिसका इस्तमाल एक projected image को display करने के लिए इस्तमाल होता है जिसे आखिर में audience देखते हैं. Projection screens को या तो permanently install किया जाता है जैसे की movie theater में, या फिर semi permanent के तोर पर लगाया जाता है जैसे की एक conference room में रखा जाता है.

Projection Screen के कई variety आते हैं जैसे की digital projectors, movie projectors screen, overhead projectors, slide projectors इत्यादि. लेकिन सभी screens में जो basic idea होता है वो समान होता है जो की है: Front projection screens काम करता है diffusely reflecting करने में उस light को जिसे की उसके ऊपर project किया जाता है, वहीँ back projection screens काम करता है, diffusely light को transmit करने में उनके द्वारा.

 

कौनसा प्रोजेक्टर अच्छा होता है खरीदने के लिए?

 

वैसे तो Projector के कई variety हैं खरीदने के लिए. लेकिन उमें से भी कुछ अच्छे होते हैं ज्यादा functions के साथ वहीँ कुछ होते हैं जिनमें ज्यादा features नहीं होते हैं. इसलिए नीचे मैंने कुछ best projectors की एक list बनायीं है जिन्हें आप चाहें तो online खरीद सकते हैं.

  • JVC DLA-X5900
  • Sony VPL-VW300ES
  • Optoma HD39Darbee Special Edition
  • BenQ W1070+
  • Optoma UHD65

 

प्रोजेक्टर चुनते समय आपको क्या जानना चाहिए? (What you need to know when choosing a projector)

 

चूंकि प्रोजेक्टर कुछ विशेष कारणों से ही प्रयोग में लाए जाए है, तो बेहतर होगा कि पहले जांच ले की क्या आपको सच में एक प्रोजेक्टर की आवश्यकता है। अगर है, तो उसको चुनते समय, आपको निम्नलिखित मानदंडों को ध्यान में रखकर किया जाना चाहिए:

1. उद्देश्य क्या है?

स्पष्ट रूप से जानें कि प्रोजेक्टर का उपयोग किस उद्देश्य के लिए किया जाएगा। एक प्रेजेंटेशन के लिए, सरल स्लाइड शो, या बेहतर गुणवत्ता और विवरण के साथ छवि आउटपुट, यह सब एक प्रोजेक्टर से किया जा सकता है। यदि प्रोजेक्टर किसी विश्वविद्यालय या स्कूल में लगाया जाएगा, तो आपको लेंस बदलने की क्षमता वाला नवीनतम मॉडल नहीं लेना चाहिए। इसके विपरीत, यदि सेट-टॉप बॉक्स से छवि डिवाइस के माध्यम से प्रदर्शित होती है, तो इसकी गुणवत्ता उत्कृष्ट होनी चाहिए।

2. पोर्टेबल है या नही?

प्रोजेक्टर का वजन और उनके आकार में परिवर्तन हो सकता हैं। कई सौ ग्राम तक के वजन के साथ पॉकेट में आ सकते हैं, तो कुछ कई किलोग्राम वजन के साथ आते है, जिन्हे ले जाने के लिए दो हाथों की आवश्यकता होगी। प्रोजेक्टर का सही आकार और वजन चुनने के बाद, उपयोगकर्ता भविष्य में इसका सुविधाजनक स्थानांतरण सुनिश्चित करेगा।

3. क्या कीमत होगी?

किसी भी उत्पाद को खरीदते समय हम उसके मूल्य को अवश्य ध्यान में रखते है। तो प्रोजेक्टर लेते समय भी हमें इस बात का विशेष ध्यान देना चाहिए कि हम किस बजट में प्रोजेक्टर ले और उसके हिसाब से उसने क्या विशेषताएं होनी चाहिए।

4. किस कार्यविधि के लिए चाहिए?

यह भी जानने की जरूरत है कि प्रोजेक्टर से कौन का कार्य किया जाएगा। स्मार्ट होम सिस्टम में इलेक्ट्रॉनिक एक्सेस वाले प्रोजेक्टर हैं। यदि किसी प्रसिद्ध कंपनी में नए उत्पादों की प्रेजेंटेशन के लिए विशेष रूप से प्रोजेक्टर का उपयोग किया जाता है तो ऐसा अतिरिक्त कार्य बेकार है। आपको यह जानना होगा कि डिवाइस पर किस गुणवत्ता के फ़ोटो और वीडियो प्रस्तुत किए जाएंगे। स्क्रीन और डिवाइस के बीच न्यूनतम दूरी क्या है? इस तरह के सवालों के जवाब यूजर के लिए अनावश्यक कार्यों में कटौती की अनुमति देंगे, जिससे कीमत भी प्रभावित होगी।

 

प्रोजेक्टर में Lens कौन सा लगते है? (Which lens is used in the projector)

 

Projector में Convex Lens का इस्तमाल किया जाता है. ये दोनों sides से outerwards curved होता है. ये magnifying lens भी actually एक convex lens ही होता है. जब light pass करती है इसके द्वारा, तब आपको एक image मिल सकती है screen में जो की बहुत ही बड़ी होती है उस object के तुलना में जिसकी ये image है. वहीँ ये Image Inverted होती है.

इसलिए ये inverted video या image को projector के भीतर छोड़ा जाता है और जिसे की बाद में project किया जाता है एक screen में inverted. इसलिए हमें finally image सीधी दिखती है.

 

प्रोजेक्टर के शिक्षा मे क्या उपयोग होता है (What is the use of projector in education)

 

Projector के बहुत से benefits तो होते ही हैं लेकिन इनका सबसे ज्यादा इस्तमाल शिक्षा में होता है मतलब की education की field में इन्हें सबसे ज्यादा इस्तमाल किया जाता है. चलिए इनका कैसे प्रयोग किया जाता है उसके विषय में चलिए जानते हैं.

जैसे की हम जानते ही हैं की अभी का समय technology का हैं ऐसे में Laptops, Smarthphones और computers का इस्तमाल प्राय सभी लोग जानते हैं. वहीँ Education sector कैसे पीछे रह सकता है. जी हाँ दोस्तों पढाई को ज्यादा interesting बनाने के लिए अब तो projectors और smart boards का इस्तमाल होने लगा है classrooms में. चलिए इनके उपयोग के विषय में और अधिक जानते हैं.

 

ज्यादा Efficient तरीके से Note-taking किया जा सकता है

 

पहले जहाँ बच्चों के लिए पढाई में concentrate करना और साथ में note लिखना इतना आसान नहीं होता था, अब projectors के इस्तमाल से notes को एक बेहतर interactive तरीके से present किया जाता है. इसके अलावा class के ख़त्म होने के बाद शिक्षक उन notes की e-copy को students के साथ share कर सकते हैं. जिससे उन्हें सही notes सही समय में मिल जाता है, जिसमें गलती होने की संभानाएं कम होती है. इसके अलावा बच्चे ज्यादा ध्यान चीज़ों को समझने में लगा सकते हैं जहाँ वो ज्यादा focussed तरीके से ये काम कर सकते हैं.

पढाई को ज्यादा Interactive बनाया जा सकता है Presentations के द्वारा जो की Students को ज्यादा Engaged रखते हैं
ये तो हम सभी जानते हैं की हमें books के theory portion के बदले में movie की story ज्यादा अच्छे ढंग से याद रह जाते हैं. इसका एक ही कारण होता है वो है presentation. ठीक वैसे ही अगर concepts को interactive videos के जरिये समझाया जाये तब ये ज्यादा याद रहता है बच्चों में. साथ ही उनकी रूचि भी काफी बढती है. इससे उन्हें पढाई ज्यादा देरी तक याद रहती है.

 

Lessons को Games के माध्यम से सिखा जा सकता है

 

आजकल internet पर इतने सारे puzzles और Quizes मेह्जुद हैं की जिनका इस्तमाल बच्चों के पढाई में भी किया जा सकता है. Education Puzzles को students के सामने रखने से उनके subjects भी याद रहता है और projector के होने से वो bore भी नहीं होते हैं. इसमें teachers अपने subjects के questions को भी discuss या quiz कर सकते हैं.

 

अलग अलग Range के Mediums से पढाया जा सकता है

 

छोटे बच्चों को पूरा विषय समझ में नहीं आता है. इसलिए अगर उसी विषय को छोटे छोटे टुकड़ों में बाँट दिया जाये तब ये उन्हें ज्यादा याद रहता है. इसमें projector के माध्यम से पहले ही तैयार किया गया slides को चालू करें और एक विषय के छोटे से portion को पढ़ने के बाद उसके related tasks या exercise को interactive तरीके से किया जा सकता है. इससे उनमें पढाई के साथ साथ team work की spirit भी बढ़ेगी.

 

Classroom Time का सही इस्तमाल होता है

 

अक्सर पहले के शिक्षा प्रणाली में classrom time का ज्यादा wastage होता था. क्यूंकि teachers को notes लिखने होते थे, उसे मिटा कर कुछ नए topics पर फिर से उन्हें लिखना पड़ता था ऐसे में students के doubts clear नहीं हो पाते थे. वहीँ projectors के आने के बाद से इन फालतू के कार्यों के लिए समय को नष्ट नहीं करना पड़ता है जिससे students ज्यादा बेहतर ढंग से पढ़ सकते हैं.

 

FAQ – Projector के बारे में अक्सर पूछे जाने वाले सवाल 

 

प्रोजेक्टर को हिंदी में क्या कहते हैं?

प्रोजेक्टर को हिंदी में ‘छवि प्रक्षेपित्र’कहते है जो एक प्रकाशीय युक्ति है जो किसी छवि को किसी तल के ऊपर प्रक्षेपित करती है।

Which projector type is best? | कौन सा प्रोजेक्टर प्रकार सबसे अच्छा है?

एक सिंगल चिप एलसीडी प्रोजेक्टर आदर्श है जबकि 3-चिप एलसीडी बेहतर रंग संतृप्ति, कम शोर स्तर और फिल्मों के लिए बेहतर काम करते हैं ।

प्रोजेक्टर से आप क्या समझते हैं?

प्रोजेक्टर एक आउटपुट डिवाइस है जो एक इमेज को एक बड़ी सतह, जैसे कि सफेद स्क्रीन या दीवार पर प्रोजेक्ट करता है।

प्रोजेक्टर कौन सा डिवाइस है?

प्रोजेक्टर ऐसा ऑप्टिकल डिवाइज़ होता है जो की एक फोटो या मूविंग फोटो को दर्शाता है एक सरफेस के ऊपर, जो की मुख्य रूप से एक स्क्रीन होता है।

प्रोजेक्टर कौन सा लेना चाहिए?

डीएलपी शार्प इमेजेज देता है, इसका रेस्पॉन्स टाइम भी बेहतर होता है और साथ ही इसमें 3D आउटपुट की भी क्षमता होती है

प्रोजेक्टर का आविष्कार कब हुआ?

प्रोजेक्टर का आविष्कार 1879 में ब्रिटिश फोटोग्राफर Eadweard Muybridge द्वारा किया गया था।

सबसे सस्ता प्रोजेक्टर कितने का है?

सबसे सस्ता प्रोजेक्टर यूनीक ले़ड प्रोजेक्टर है। इसकी ऑनलाइन प्राइस 2,898 रुपए है। ये ऑनलाइन मिलने वाला भारत का सबसे सस्ता प्रोजेक्टर भी है।

 

 

 

 

Conclusion

 

 

मुझे उम्मीद है की आपको मेरी यह लेख Projector क्या है? इसके प्रकार और उपयोग की पूरी जानकारी (2022) जरुर पसंद आई होगी. मेरी हमेशा से यही कोशिश रहती है की readers को पूरी जानकारी प्रदान की जाये जिससे उन्हें किसी दुसरे sites या internet में उस article के सन्दर्भ में खोजने की जरुरत ही नहीं है. इससे उनकी समय की बचत भी होगी और एक ही जगह में उन्हें सभी information भी मिल जायेंगे.

यदि आपके मन में इस article को लेकर कोई भी doubts हैं या आप चाहते हैं की इसमें कुछ सुधार होनी चाहिए, तब इसके लिए आप नीचे comments लिख सकते हैं.यदि आपको यह लेख पसंद आया या कुछ सीखने को मिला तब कृपया इस पोस्ट को Social Networks जैसे कि Facebook, Twitter इत्यादि पर share कीजिये.


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