Router क्या है , और काम कैसे करता है पूरी जानकारी

हैलों दोस्तों ! Tejwiki.in में आपका स्वागत है| आज हम आपको बताएँगे Router क्या है और Router Kaise Kaam Karta Hai, हमने हमारी पिछली पोस्ट में बताया था की Aadhar Biometric Kya Hai? आशा करते है वो पोस्ट आपको पसंद आई होगी| आज दुनिया का हर दुसरा व्यक्ति इंटरनेट का Use करता है, क्योंकि आज हमारा हर काम इंटरनेट के जरिये ही होता है, जैसे शॉपिंग करना, बिल भरना, मोबाइल और DTH रिचार्ज करना आदि|

इंटरनेट एक ऐसी चीज़ जिसने हमारी दिनचर्या आसान बनाई है, इतना ही नहीं इंटरनेट के जरिये आज हर काम घर बैठे हो जाता है, जिससे हमारा समय और मेहनत दोनों बचती है, लेकिन बहुत से ऐसे भी लोग है जिन्हें पता भी नहीं होता है की इंटरनेट क्या होता है| इसलिए आज हम आपको इंटरनेट से जुड़े एक रोचक विषय के बारे में बताने जा रहे है जिसका नाम है Router, शायद आप भी नहीं जानते होंगे की Router Kya Hai, 

Router क्या है , और काम कैसे करता है पूरी जानकारी

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Router क्या होता है? (What is Router)

 

Router एक Hardware Networking Device है. इसका इस्तेमाल  Network में किया जाता है. जब भी कोई data जो एक Packet के रूप में एक Network से दुसरे Network में Travel करता है. तब Router, Packet data को Receive करता है, और Data Packet में जो भी छुपी हुई Information है, उसको Analyze करने के बाद Destination Device को Forward करता है. इस Networking Device को अलग अलग Networks को अपसा में Wire या Wirelessly जोड़ने के लिया किया जाता है. वैसे तो इसका इस्तमाल घर में भी होता है जिसको हम Wireless Router कहते हैं. जिसे आप Internet को Access करते हैं.

जैसे की आपको पता होगा CompuInternetworkOSI Model को Follow करता है. Router OSI Model के 7 Layer में से Network Layer पे काम करता है. मैंने आपको बताया Hardware और Software से यह Device बनी है. इसमें एक Internet work Operating System, CPU, Memory Storage और कुछ I/O Ports रहते हैं जैसे की आप देखे ही होंगे. यह Operating System Windows या MAC जैसे नहीं होते. Storage Memory में Routing Algorithm और Routing Table को Store किया जाता है.

Routing Algorithm और Routing Table के जरिये यह पता लगता है की जो Input Packet Receive हुआ है.Router क्या है उस Packet को किस Network या फिर कोनसे Device के पास भेजना है. जिसको Analyze कहते हैं. Ex से आप अच्छे से समझ जाओगे दोस्त.

EX– जैसे courier boy, एक Router है. Courier boy, courier Office से Parcel को Receive करता है. इसके बाद Parcel के उपर Parcel जिसके नाम पे आया है उसका Address रहता है. Courier boy Address को देखने बाद वो decide करता है Parcel को किस Location में और कहाँ देना है.

इसके बाद ही वो Parcel को Receiver के Address पे भेजता है. (यह Process सारे Parcels पे लागु होती है. Courier boy के पास address की लिस्ट रहती है). अब इस उदहारण को राउटर के जरिए समझते हैं.  उपर दिए गए उदहारण के मुताबिक “Parcel” आपका Data packet है. जैसे courier boy Address को ढूंडता है. वैसे ही Router भी Routing Table के द्वारा Packets से Receiver Address का पता निकाल के Shortest Path का चयन करता है. इसके बाद Receiver के पास भेज देता है. Courier boy के पास एक address की लिस्ट रहती है वैसे ही Routing Table में भी Details रहती है. चलिर अब जानते है यह Device कार्य कैसे करता है.

 

ROUTER ( राउटर ) क्या होता है?

 

यह एक ऐसा डिवाइस ( device) है जोकि एक ही समय पर कई सारे कंप्यूटर को डाटा प्रदान कता है वह राउटर कहलाता है 1974 में पहला Router DEVELAP किया गया था| और 1976 तक, PDP-11 आधारित Router इंटरनेट का एक प्रोटोटाइप एक्सपेरिमेंटल वर्जन बनाने के लिए इस्तेमाल किया गया था। 1970 के दशक के मध्य से लेकर 1980 के दशक तक मिनी कंप्यूटरों को Router के रूप में इस्तेमाल किया गया था। टेक्निकल शब्दों में, एक राउटर एक लेयर 3 नेटवर्क GATEWAY डिवाइस है, जिसका अर्थ है कि यह दो या अधिक नेटवर्क्स को जोड़ता है और राउटर OSI मॉडल की नेटवर्क लेयर पर ऑपरेट होता है।

What Is Router In Hindi

 

Routers छोटे इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस होते हैं जो वायर्ड या वायरलेस कनेक्शन के माध्यम से कई कंप्यूटर नेटवर्क को कनेक्‍ट करते हैं। Routers डिवाइस में सॉफ़्टवेयर होता हैं जो किसी विशेष ट्रांसमिशन के लिए, उपलब्ध paths का सर्वोत्तम path निर्धारित करने में सहायता करते हैं।आसन भाषा में Router एक कंप्‍यूटर नेटवर्क को दूसरे कंप्‍यूटर नेटवर्क से कनेक्‍ट करता हैं या एक कंप्‍यूटर नेटवर्क को इंटरनेट से कनेक्‍ट करता हैं।

इसलिए Route कि पोजिशन आपके मॉडेम और कंप्यूटर के बीच होती है। नेटवर्क को इंटरनेट से कनेक्‍ट करने के लिए Route मॉडेम से कनेक्‍ट होना चाहिए। Router क्या है इसलिए, अधिकांश राउटर में एक विशिष्ट ईथरनेट पोर्ट होता है जिसे केबल या डीएसएल मॉडेम के ईथरनेट पोर्ट से कनेक्ट करने के लिए डिज़ाइन किया गया है।

Router Definition

 

Router एक हार्डवेयर डिवाइस है जो की इनकमिंग नेटवर्क पैकेट्स को रिसीव करने के बाद Analyse करके दूसरे नेटवर्क मे Forward या Move करते है, अगर हम इंटरनेट के केस मे Router की बात करते है तो Router पैकेट्स को Analyse करके Next Network Point का पता लगा कर Packet को डेस्टिनेशन पर फॉरवर्ड करता है|

तो ये था Meaning Of Router In Hindi, उम्मीद करते है आपको समझ आ गया होगा, लेकिन क्या आपको पता है Router Ke Prakar भी होते है, हम आपको बताते है विस्तार से Router Ke Prakar

 

राऊटर का इतिहास क्या है?(History of Router)

 

एक राउटर की आइडीया, जिसे गेटवे कहा जाता था, कंप्यूटर नेटवर्किंग रिसर्चर्स का एक ग्रुप से आया जो एक अंतर्राष्ट्रीय नेटवर्क वर्किंग ग्रुप नाम के एक आर्गेनाइजेशन था, जो 1972 में इंटरनेशनल फेडरेशन फॉर इन्फॉर्मेशन प्रोसेसिंग की एक कमेटी बन गई।

1974 में, पहला router डेवलप किया गया था और 1976 तक, PDP-11 आधारित Router इंटरनेट का एक प्रोटोटाइप एक्सपेरिमेंटल वर्जन बनाने के लिए इस्तेमाल किया गया था। 1970 के दशक के मध्य से लेकर 1980 के दशक तक मिनी कंप्यूटरों को Router के रूप में इस्तेमाल किया गया था। आज, हाई-स्पीड मॉडर्न Router वास्तव में तेजी से डेटा पैकेट फॉरवार्डिंग के लिए अतिरिक्त हार्डवेयर वाले कंप्यूटर और एन्क्रिप्शन जैसे विशेष सिक्‍युरिटी फ़ंक्शन हैं।

 

राउटर कैसे कार्य करता है? (How Router Works in Hindi)

 

जैसे की आपको पता है Router , Packet को एक network से दुसरे Network में Forward करने का काम करता है. यह भी कह सकते हो Source से Destination Address तक packet भेजता है. इसका मुख्य काम है packet को Receive करना और Receiver को Deliver करना. Router क्या है आपने अपने computer से एक Facebook Message भेजा अपने दोस्त के पास, जो अभी Delhi में है. सबसे पहले message एक Packet में convert हो जाता है और पास वाले Router के पास पहुँच जाता है. अब Router, Routing Protocol से Routing Table को check करता है.

Routing table में आस पास वाले जितने भी Router हैं उन सभी का Address और path Distance रहता है. फिर इसके बाद सबसे पास वाले Router के पास Packet को Forward किया जाता है,

जिसमे Receiver का IP address रहता है. Packet अगले Router के पास पहुँचते ही वो भी फिर से Shortest Path को Check करता है और अगले Router के पास भेज दिया जाता है. कुछ इस तरह से Packet Receiver Computer के पास पहुँच जाता है.

एक Router बहुत सारे Network को जोड़ता भी है और अपने Routing table को Maintain भी करता है. maintain मतलब Update करता रहत है. हर एक Router अपने अपने आस पास वाले Router की जानकारी रखते हैं. Routing Protocol सारे Routers में रहता है जिसकी मदद से वो आपस में बात चित करते हैं. और इसके साथ साथ अपने connected Networks की Information को आपस में Share करते हैं, Routing table को Update करते हैं. कुछ इस तरह से यह Networking Device काम करती है.

 

राउटर आपके व्यवसाय में कैसे मदद करते हैं?

 

आधुनिक नेटवर्क कंप्यूटिंग के लिए एक सामान्य टूल, राउटर कर्मचारियों को स्थानीय और इंटरनेट दोनों के नेटवर्क से जोड़ता है, जहां लगभग हर आवश्यक व्यावसायिक गतिविधि होती है। राउटर के बिना, हम सहयोग करने, कम्युनिकेशन करने या जानकारी एकत्र करने और सीखने के लिए इंटरनेट का उपयोग करने में सक्षम नहीं होंगे।

राउटर सुरक्षा भी प्रदान कर सकते हैं। एम्बेडेड फ़ायरवॉल और सामग्री फ़िल्टरिंग सॉफ़्टवेयर आपके ऑनलाइन अनुभव को प्रभावित किए बिना अवांछित कंटेंट और दुर्भावनापूर्ण वेबसाइटों से अतिरिक्त सुरक्षा प्रदान करते हैं।

हालाँकि, राउटर केवल डेटा ट्रांसमिशन या इंटरनेट कनेक्शन के लिए नहीं है। अधिकांश राउटर आपको हार्ड ड्राइव को कनेक्ट करने और उन्हें फाइल-शेयरिंग सर्वर, या प्रिंटर के रूप में उपयोग करने की अनुमति देते हैं, जिसे तब नेटवर्क पर किसी के द्वारा भी एक्सेस किया जा सकता है।

 

Router को Configure कैसे करे?

 

सबसे पहले आपको राउटर का वेब पेज ओपन करना होगा उसके लिये आप अपने किसी भी ब्राउज़र में राउटर का ip address टाइप करने होगा। डिफ़ॉल्ट ip 192.168.1.1 या 192.168.0.1 होता है।  यदि इन ip से राउटर का सेटअप ओपन नहीं हो तब आप राउटर के डॉक्यूमेंट में देख सकते है वह आपको login ip दिया होता है,

जैसे ही आप ip ओपन करेंगे आपको एक सामने लॉगिन पेज आएगा, उसमे आपको यूजर नाम और पासवर्ड एंटर करना है, router login करने के लिये यूनिवर्सल लॉगिन id में admin ओर pass में password एंटर करे जैसे ही आप लॉगिन हो जाये आप अपनी जरूरत के हिसाब से सेटअप करे। सभी Router default password ओर id समान होता है admin ओर password आप इसे अपने हिसाब से चेंज कर सकते है।

 

Router के Components

 

जैसे की आपको पता है उपर इस लेख में इसकी जानकरी दी गई है. यह एक specialized Computer है. इसके भी अलग अलग parts हैं. जिनके नाम निचे दिए गए हैं.

  1. Central Processing Unit (CPU)
  2. Flash Memory
  3. Non-Volatile RAM
  4. RAM
  5. Network Interfaces
  6. Console

Central Processing Unit (CPU)

CPU जो एक ब्रेन होता है, यह Special Software को चलता है जिसका नाम है os. कुछ OS हैं जैसे Junos, Juniper Routers को RUN करते है और Cisco IOS Cisco Routers को चलाते है. यह Operating system जितने भी routers के components हैं, उन सभी को manage करता है.

Flash Memory :

हर Electronic Device के लिए Memory चाहिए जिस में operating system को store किया जाता है. Flash Memory को Computer के साथ Compare करें तो यह एक Hard disk ही है. इस Flash memory में Routing algorithm, Routing Protocol, Routing Table  Store होता है.

Non-Volatile RAM:

इसके नाम से ही आप समझ गए होंगे की यह Memory Permanent है.  इसके अंदर  Operating System का Back up और startup Version Store होता है. जब कभी Router Boot होता है तब इस Memory से ही Programs Load होते हैं.

RAM:

जब भी Router On होता है, तब Operating System को Ram में Load किया जाता है. इसके बाद Router, Routes निर्धारित करता है. दुसरे Routers से यह Routes की जानकारी देखता है (via RIP RIP (v1 and v2), OSPF, EIGRP, IS-IS or BGP).

RAM  के अंदर ARP tables, routing tables, routing metrics और दुसरे data को store किया जाता है.  ARP tables, routing tables, routing metrics इनकी मदद से Packet Forwarding Process Speed होती है.

Network Interfaces:

हमेसा से Routers में बहुत सारे Network Interface रहते हैं. Operating System में बहुत सारे Drivers होते हैं. इन Drivers की मदद से Routers को यह पता लगता है की कोनसे Port में कोनसा Network का WIRE Connected है. दुसरे Routers से Routes को सिखने की क़ाबलियत होती हैं और Packet सही route पे Transmit किया जाता है.

Console:

Router को Managing और Configuring करने का सारा काम Console में ही होता है. Configuration और troubleshooting commands console से दिए जाते हैं.

 

Router के कार्य (FUNCTIONS OF A ROUTER in hindi)

 

अब चलिए Router के कार्यों के बारे में जानते हैं :-

  • LAN को Broadcast करने से रोकता है.
  • यह default Gateway जैसे काम करता है.
  • Protocol Translation में मदद करता है
  • Network के बिच में Route बनाने का काम करता है.
  • Data को sender से Receiver तक deliver करने का काम करता है
  • दो Networks को आपस में जोड़ने का काम करता है.
  • Loop free path बनाने में लगा रहता है.
  • Destination तक Packet को पहुँचाने के लिए Shortest path ढूंड निकालता है.

Routing Table

 

Routing Table बहुत सारे Rules से बना हुआ है, जैसे की इसका नाम ही Table है. इसीलिए यह  हमेसा से Table के रूप में रहता है. इसका उपयोग यह निर्धारण करने के लिए किया जाता है की Internet Protocol Network में Packet को किस दिसा में भेजा जाएगा.

जितने भी IP enabled Devices हैं जैसे Router व Switches वो सभी Routing Table का इस्तमाल करते हैं.

Routing Table में वो सभी जानकारी रहती है, जिसे Packet को Destination तक भेजने के लिए सबसे अच्छा path(रास्ता) का चयन करने में आसानी हो सके. हर पैकेट में Source और Destination की जानकरी रहती है.  

Packet Receive होने के बाद Network Device, packet की छान बिन करता है और जो Inforamtion प्राप्त होती है उसे Routing Table entry के साथ मैच करवाता है. इसके बाद यह Packet आगे किस Network Device के पास भेजा जाएगा यह निर्धारित किया जाता है.

 

इन्हें भी पढ़ें:-

 

Routing Table तालिका में निम्न लिखित जानकारी रहती हैं

 

  1. Destination: Packet को किस Destination को भेजना है उसका IP Address .
  2. Next hop: अगले नेटवर्क device का IP ADDRESS
  3. Interface: Packet को जिस Network में भेजा जाता है उसके Interface की जानकारी रहती है.
  4. Metric: routing Table में जितने भी Route मोजूद हैं उन सभी का Cost कितना होगा और इसे यह जानने में आसानी होती है की Packet को किस रस्ते से भेजने में कम खर्चा आएगा.
  5. Routes: Routers के साथ जितने भी Attached Network या दुसरे Devices हैं उन सभी की जानकारी और Routes की जानकारी रहती है.

Routing tables को  manually या dynamically maintain कर सकते हैं .static Network Devices के table को जब तक Administrator नहीं बदलता तब तक नहीं बदलता है.

Dynamic routing में Devices अपना खुदका Routing Table बनाते हैं और Maintain भी करते हैं. इसके लिए devices Routing Protocol का इस्तमाल करते हैं. एक दुसरे से Information Exchange भी करते हैं.

 

Types of Routers

 

आपको market में अलग अलग तरह के Router देखने को मिल जाएंगे. इस्तमाल के मुताबिक उन्हें अलग अलग किया गया है. चलिए विस्तार से इनके बारे में जानते हैं. .

Broadband Routers

Broadband Router कई प्रकार के काम कर सकते हैं. इनका इस्तमाल Computers को आपस में जोड़ने के लिए और Internet से जोड़ने के लिए किया जाता है.

आगर Voice Over IP Technology के द्वारा आप अपने फ़ोन को Internet से जोड़ना चाहते हैं. तो आप समझ जाना वहां इस VOIP connection के लिए आपको Broadband Router की उपयोग किया गया है. यह एक Special Type के Modem होते हैं जिनमे Ethernet और फ़ोन Jacks भी होते हैं.

Wireless Router

Wireless Router आजकल हर कोई इनके बारे में जानता है. घर, Office, College में इनका इस्तमाल ज्यादा होता है. क्या पता आप अभी इस Wireless Router से ही आप Internet Access कर रहें हो सायद. यह wireless Router wireless signal का area बनाता है और इस खेत्र में जितने भी Computers, Tablet, Mobile फ़ोन हैं वो सभी Internet का इस्तमाल कर सकते हैं.

security को ध्यान में रखते हुए इनमे Password System रहता है. सुरक्षा के लिए Password और IP Address का इस्तमाल किया जाता है. आप देखे ही होंगे जब आप WiFi का इस्तमाल करते हैं. तब आप एक WiFi से connect करने से पहले आपको password डालने की आवश्यकता होती है. यही इसका Security Feature है.

 

कुछ अन्य प्रकार के Routers

 

Edge Router

इस प्रकार के Router को ISP (Internet Service Provider) के किनारे रखा जाता है. बाहरी Protocols जैसे BGP (Boarder Gateway Protocol) को दुसरे ISP के BGP के साथ Configure करते हैं.

Subscriber Edge Router

Subscriber Edge Router end user (Enterprise) Organization के अंतर्गत आते हैं. इसे EXTERNAL BGP को प्रदाता के AS के रूप में प्रसारित करने के लिए Configure किया गया है

Inter Provider Border Router

इस तरह के Routers को ISPs को अपसा में जोड़ने के लिया जाता है. जैसे Airtel को Reliance के साथ और Vodafone को Jio के साथ. यह BGP SESSION को Maintain करता है.

Core Router

LAN Network के Backbone की तरह जो Router काम करता है, उसे Core Router कहते हैं. यह अलग अलग Distributed Routers को आपस में जोड़ने के लिए है. मतलब अगर एक Company है जिसके बहुत सारे Routers होंगे जो अलग अलग Location में होंगे. इन सभी Routers आपस में जोड़ने के लिए Core Router का इस्तमाल किया जाता है. इसका नाम भी इसी वजह से Core है.

 

राऊटर के फीचर

 

* राऊटर OSI Model में Network Layer या Layer 3 पर काम करता है

* यह कई नेटवर्क्स को एक दुसरे से जोड़ता है और एक नेटवर्क से दुसरे नेटवर्क के बीच डाटा को Send करने का काम करता है

* राऊटर कई तरह के पोर्ट्स की मदद से एक High-speed इन्टरनेट कनेक्टिविटी प्रोवाइड करता है जैसे- Fast-ethernet, STM लिंक पोर्ट इत्यदि

* यह Local area network(LAN) और Wide area network(WAN) दोनों तरह के नेटवर्क में इस्तेमाल होता है

* राऊटर के मुख्य कॉम्पोनेन्ट सेंट्रल प्रोसेसिंग यूनिट (CPU), फ़्लैश मेमोरी, रैम मेमोरी,नेटवर्क और इंटरफ़ेस कार्ड इत्यदि होते है

* राऊटर दुसरे नेटवर्किंग डिवाइस जैसे- Hub, Switch और Bridge के मुकाबले थोड़े महेंगे होते है इनके पोपुलर मैन्युफैक्चरर Cisco, D-Link, Juniper और Nortel है

 

मोडेम और राउटर मे क्या फर्क है

 

Router kya hai यह तो आप जानते ही होंगे क्या आप मोडेम और राउटर में क्या फर्क है के बारे में जानते हैं, यदि नहीं तो आपको जानकारी के लिए बता दें की Modem और Router के बीच सबसे बड़ा अंतर कनेक्टिविटी का है। Router क्या है जहां Modem आपके घर के नेटवर्क को ISP यानी Internet Service Provider के साथ कनेक्ट करता है,

वही Router आपके Wired या Wireless Devices को एक दूसरे के साथ कम्युनिकेट करने के साथ इंटरनेट के साथ कनेक्ट करने में मदद करता है। Modem बगैर Router के भी इंटरनेट Provide कर सकता है, पर Router बिना Modem के सीधे Internet को प्रोवाइड नहीं कर सकता है। Modem केवल एक कंप्यूटर को ही इंटरनेट प्रदान कर सकता है परंतु Router एक साथ 2 या फिर 2 से ज्यादा कंप्यूटर को इंटरनेट Provide कर सकता है। 

क्या एक राउटर इंटरनेट की गति बढ़ा सकता है?

 

हां, यदि आप वाई-फाई का उपयोग कर रहे हैं तो आपका राउटर आपकी इंटरनेट स्पीड को प्रभावित कर सकता है। यह आपके होम नेटवर्क के सभी डेटा को मैनेज और प्रोसेस करता है—इसलिए एक अच्छा राउटर आपके इंटरनेट की गति का अधिकतम लाभ उठाता है, जबकि एक धीमा राउटर इसे बाधित कर सकता है।

लेकिन इस बात का ध्यान रखें: आपका इंटरनेट कनेक्शन केवल आपके प्लान जितना तेज़ है। यदि आप 400 एमबीपीएस प्‍लान के लिए भुगतान कर रहे हैं, तो आपको बस इतना ही मिलता है। ऐसा कोई डिवाइस नहीं है जिसे आप खरीद सकते हैं जो तेज प्‍लान में अपग्रेड करने के अलावा उस गति को तेज कर देगा।

 

व्यावसायिक नेटवर्क और इंटरनेट के लिए राउटर

 

होम नेटवर्किंग लोकप्रिय हो जाने से पहले, राउटर केवल व्यवसायों और विद्यालयों पर मिल सकते थे. प्रत्येक की लागत हजारों डॉलर आती थी और स्थापित करने और प्रबंधित करने के लिए विशेष तकनीकी प्रशिक्षण की आवश्यकता होती थी.

सबसे बड़ा और शक्तिशाली राऊटर इंटरनेट की रीढ़ की हड्डी होता है.  इन routers के माध्यम से इंटरनेट सेवा प्रदाता (ISP) के आपसी नेटवर्क के बीच बहने वाला कई terabits डाटा का प्रबंधन होता है.

 

Router के उपयोग (Uses of Router)

 

  • राउटर का उपयोग BSC, MGW, IN, SGSN और अन्य सर्वर जैसे दूरस्थ स्थान नेटवर्क के साथ हार्डवेयर उपकरणों को जोड़ने के लिए किया जाता है।
  • यह डेटा ट्रांसमिशन की तेज़ दर के लिए समर्थन प्रदान करता है क्योंकि यह कनेक्टिविटी के लिए उच्च एसटीएम लिंक का उपयोग करता है; इसलिए इसे वायर्ड या वायरलेस कम्युनिकेशन दोनों में इस्तेमाल किया जाता है।
  • इंटरनेट सेवा प्रदाता व्यापक रूप से ई-मेल, एक वेब पेज, छवि, आवाज, या एक वीडियो फ़ाइल के रूप में स्रोत से गंतव्य तक डेटा भेजने के लिए राउटर का उपयोग करते हैं। इसके अलावा, यह गंतव्य के आईपी पते की मदद से दुनिया भर में डेटा भेज सकता है।
  • राउटर एक्सेस प्रतिबंधों की पेशकश करते हैं। इसे इस तरह से कॉन्फ़िगर किया जा सकता है जो कुछ उपयोगकर्ताओं को समग्र डेटा तक पहुंचने की अनुमति देता है और दूसरों को केवल कुछ डेटा तक पहुंचने की अनुमति देता है, जो उनके लिए परिभाषित है।
  • राउटर का उपयोग WAN संचार के लिए सॉफ्टवेयर टेस्टर द्वारा भी किया जाता है। उदाहरण के लिए, एक संगठन का सॉफ्टवेयर प्रबंधक आगरा में स्थित है, और इसकी कार्यकारिणी पुणे या बैंगलोर जैसी अलग जगह पर स्थित है। फिर राउटर अपने सॉफ्टवेयर टूल्स और अन्य एप्लिकेशन को रनर की मदद से अपने पीसी को WAN आर्किटेक्चर का उपयोग करते हुए राउटर से जोड़कर राउटर की मदद से शेयर करने की विधि प्रदान करता है।
  • राउटर का उपयोग किसी संगठन के संचालन और रखरखाव केंद्र को स्थापित करने के लिए किया जाता है, जिसे एनओसी केंद्र के रूप में जाना जाता है। एक दूर के स्थान पर सभी उपकरण केंद्रीय स्थान पर ऑप्टिकल केबल पर राउटर द्वारा जुड़ा हुआ है, जो मुख्य लिंक और सुरक्षा लिंक टोपोलॉजी के माध्यम से अतिरेक भी प्रदान करता है।

 

वायरलेस राउटर की अधिकतम दूरी क्या है? (maximum distance of a wireless router?)

 

सामान्यतः एक indoors कनेक्शन पर wireless router की रेंज 150 फीट होती है वहीं खुले आसमान के नीचे यह दूरी 300 फीट तक होती है। घर के अंदर एवं बाहर दोनों स्थिति में वायरलेस राउटर की दूरी के कम एवं अधिक होने का एक मुख्य कारण यह है कि जब indoor कनेक्शन स्थापित होता है तो दीवार या फिर अन्य ऑब्जेक्ट्स की वजह से घर के भीतर वायरलेस कनेक्शन की दूरी कम होती जाती है। और इस तरह indoor कनेक्शन में 75% तक की दूरी कम हो जाती है। अब सवाल आता है कि Router कितने प्रकार के होते हैं?

 

Router के फायदे:

 

  • collision feature की सुविधा के कारण, नेटवर्क ट्रैफ़िक को कम किया जा सकता है।
  • ब्रॉडकास्टिंग डोमेन के कारण नेटवर्क ट्रैफ़िक को कम किया जा सकता है।
  • यह एक Mac address और IP address प्रदान करता है जो एक नेटवर्क में सबसे अच्छा मार्ग चुनने में सक्षम होता है।
  • वायर्ड या वायरलेस नेटवर्क से कनेक्ट करने में आसान।
  • अत्यधिक पासवर्ड के साथ सुरक्षित है।
  • जानकारी का कोई नुकसान नहीं होता है।
  • यह ईथरनेट केबल, वाई-फाई, डब्ल्यूएलएएन जैसे विभिन्न नेटवर्क आर्किटेक्चर से जुड़ सकता है
  • वायरलेस राउटर के कारण, लैपटॉप या पीसी के लिए इंटरनेट से कनेक्ट करना आसान है। तारों के एक गुच्छा के बारे में चिंता करने की कोई ज़रूरत नहीं है।

 

Business Networks और इंटरनेट के लिए Router का उपयोग

 

होम नेटवर्किंग के लोकप्रिय होने से पहले, राउटर केवल व्यवसायों और स्कूलों में इस्तमाल किये जाते थे. इनकी कीमत हजारों डॉलर में होती थी और इसे इनस्टॉल करने और मैनेज करने के लिए विशेष तकनीकी प्रशिक्षण की आवश्यकता होती थी.

इंटरनेट की सबसे बड़ी रीढ़ की हड्डी और सबसे शक्तिशाली नेटवर्क कॉम्पोनेन्ट राउटर है. इन राउटर को इंटरनेट सेवा प्रदाता (ISP) नेटवर्क के माध्यम से एक दूसरे से कनेक्ट करते है, राऊटर कई टेराबिट डेटा को प्रबंधित(Manage) कर सकता है.

 

Routing Table in Hindi – रूटिंग टेबल क्या है?

 

एक राऊटर routing table बनाता है जिनमें नीचे दी गई information होती है।

  • Destination network और उसका sub-net mask होता है।
  • Destination network तक जाने के लिए next hop router के बारे में information होती है।
  • Routing metrics और administrative distance स्टोर होती है।

Routing table 2 तरह के protocols से सम्बन्धित होती है।

  1. Routed protocols – ये network layer protocols होते हैं। ये protocols डाटा को एक network से दूसरे network में भेजने के लिए responsible (जिम्मेदार) होते है। उदाहरण के लिए IP (Internet Protocol) और IPX आदि।
  2. Routing protocols – इन protocols का प्रयोग routing tables में network, topology और  hop की information को build (निर्मित) करने के लिए किया जाता है। इन सारी information को dynamically (automatically) build किया जाता है। उदाहरण के लिए RIP, IGRP और OSPF आदि।

Destination network तक सबसे बेहतर route को खोजने के लिए router नीचे दिए गये तीन elements का इस्तेमाल करता हैं.

  1. Prefix length – यह network को identify करने के लिए bits की quantity (मात्रा) होती है. इसके द्वारा सबसे सटीक route को निर्धारित किया जाता है. prefix length जितनी ज्यादा अधिक होती है route उतना ही ज्यादा सटीक होता है.
  2. Metric – Metric एक router को routing protocol के अंतर्गत सबसे बेहतर route खोजने की योग्यता देती है। Distance vector protocols दूरी (distance) को metric की तरह यूज़ करते है और link state protocols जो है वे shortest path first algorithm द्वारा calculate की गई cost को metric की तरह यूज़ करते है।जिन routes की best metric होती है वही routing tables में add किये जाते है। यहाँ तक कि यदि किसी routing protocol के पास एक ही network तक जाने के 4 route है तो भी जो metric सबसे better होगी उसे ही routing table में add किया जायेगा। यदि equal metric के एक से ज्यादा route available है तो load balance के द्वारा सही metric को choose किया जायेगा।
  3. Administrative Distance – यदि router पर एक से अधिक routing protocols चल रहे है तो किस protocol पर सबसे अधिक trust (विश्वास) करना है ये administrative distance के द्वारा Determine (निर्धारित) किया जाता है।जहाँ पर administrative distance सबसे कम होती है वही protocol choose किया जाता है। Administrative distance एक numerical value होती है जो dynamic protocols को assign की जाती है। ये fixed होती है।

 

Conclusion

 

मुझे उम्मीद है की आपको मेरी यह लेख  Router क्या है , और काम कैसे करता है पूरी जानकारी जरुर पसंद आई होगी. मेरी हमेशा से यही कोशिश रहती है की readers को पूरी जानकारी प्रदान की जाये जिससे उन्हें किसी दुसरे sites या internet में उस article के सन्दर्भ में खोजने की जरुरत ही नहीं है. इससे उनकी समय की बचत भी होगी और एक ही जगह में उन्हें सभी information भी मिल जायेंगे.

यदि आपके मन में इस article को लेकर कोई भी doubts हैं या आप चाहते हैं की इसमें कुछ सुधार होनी चाहिए, तब इसके लिए आप नीचे comments लिख सकते हैं.यदि आपको यह लेख पसंद आया या कुछ सीखने को मिला तब कृपया इस पोस्ट को Social Networks जैसे कि Facebook, Twitter इत्यादि पर share कीजिये.


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