Tester क्या है? अर्थ टेस्टर का उपयोग कैसे करें? पूरी जानकारी (2023)

जब किसी संस्था या पावर हाउस या छोटे सबस्टेशन के लिए अर्थिंग करते हैं Tester क्या है? तो हमें अर्थिंग करने से पहले यह सुनिश्चित करना होता है कि जहां पर हम अर्थिंग कर रहे हैं उस जगह की जमीन का प्रतिरोध कितना है।

अर्थिंग के लिए जमीन का प्रतिरोध 1 ओम से कम होना चाहिए। इस मानक प्रतिरोध का पता लगाने के लिए हम भू परीक्षक (Earth Tester in hindi) नामक यंत्र का इस्तेमाल करते हैं।

अगर आपको नहीं पता कि किसी तार में इलेक्ट्रिसिटी आ रही है या नहीं तो आप उस तार पर लाइन टेस्टर लगा कर उसे चेक कर सकते हैं. लेकिन लाइन टेस्टर का इस्तेमाल ज्यादा Tight पेच को खोलने के लिए नहीं किया जा सकता. और ना ही इस पर किसी प्रकार के हथौड़े से चोट मारी जा सकती अगर इस पर हथौड़े से चोट मारी जाए तो यह पूरी तरह से टूट जाएगा.

 

Tester क्या है? अर्थ टेस्टर का उपयोग कैसे करें? पूरी जानकारी (2021)
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Line/Phas Tester  क्या है?

 

लाइन टेस्टर दिखने में तो पेचकस की तरह ही होता है. और कई बार इसका इस्तेमाल पेचकस के रूप में भी किया जाता है लेकिन लाइन टेस्टर का असल कार्य किसी भी तार में Phase को जांचने के लिए किया जाता है. अगर आपको नहीं पता कि किसी तार में इलेक्ट्रिसिटी आ रही है या नहीं तो आप उस तार पर लाइन टेस्टर लगा कर उसे चेक कर सकते हैं. लेकिन लाइन टेस्टर का इस्तेमाल ज्यादा Tight पेच को खोलने के लिए नहीं किया जा सकता. और ना ही इस पर किसी प्रकार के हथौड़े से चोट मारी जा सकती अगर इस पर हथौड़े से चोट मारी जाए तो यह पूरी तरह से टूट जाएगा.

 

 

अर्थ टेस्टर(भु-परीक्षक) क्या है? (Earth tester in hindi)

 

अर्थ टेस्टर एक यंत्र है जो earth इलेक्ट्रोड तथा जमीन के बीच का संपर्क प्रतिरोध का मान बताता है। मतलब कि हमे जिस स्थान पर earthing करना है। उस स्थान पर एक अर्थ इलेक्ट्रोड(earth electrode) जमीन मे गाड़ दिया जाता है। तथा उससे कुछ दूरी पर अन्य दो इलेक्ट्रोड गाड़ कर उन दोनों के बीच का प्रतिरोध ज्ञात किया जाता है।

 

जमीन का प्रतिरोध मापना जरूरी क्यों है (why we need to measure the resistance of earth before earthing)

 

दोस्तों इस सवाल का जवाब जानना बहुत ही जरूरी है। जब अर्थिंग किया जाता है तो यह भी ध्यान दिया जाता है कि हमारा अर्थिंग उचित तरीके से काम कर रहा है या नहीं। हम जानते हैं कि अर्थिंग तभी उचित तरीके से काम करता है जब अर्थ इलेक्ट्रोड और जमीन के बीच का संपर्क प्रतिरोध 1 ओम से कम हो। क्योंकि कभी-कभी ऐसा होता है कि हम बिना जमीन का परीक्षण किए अर्थिंग कर देते हैं।

अर्थिंग की continuity की जांच भी सही से दिखाता है, लेकिन जब अर्थ इलेक्ट्रोड का भूमि से संपर्क अच्छा नहीं होता है, तो लीकेज करंट भूमि में पास नहीं होता है। वहां पर हमारी अर्थिंग फेल हो जाती है। अतः अर्थिंग को बड़े कुशलता से करने की जरूरत होती है। यही कारण है कि हमें भूमि का प्रतिरोध परीक्षण करना अनिवार्य होता है।

 

अर्थ टेस्टर की संरचना (structure of earth tester)

 

अर्थ टेस्टर की संरचना काफी सरल होती है। यह बॉक्स नुमा आकार का एक यंत्र होता है। इसमें एक तरफ चार लीड सॉकेट होते हैं जिसमें चार प्रकार के लीड लगाए जाते हैं।

Earth Tester in hindi
Earth tester
इस यंत्र पर 1 मीटर लगा होता है। जिस पर प्रतिरोध की रीडिंग दिखाती है। इसकी दूसरी तरफ एक हैंड लगा होता है। जिसे घुमाने से इसके अंदर स्थापित किया हुआ परमानेंट मैग्नेट डीसी जनरेटर विद्युत उत्पन्न करता है।

यह चार साकेत C1 C2 तथा P1 P2 होते हैं जिसे बाहरी टर्मिनल भी कहते हैं।

  • P1 :- पहला विभव सिरा (primary potential terminal)
  • P2 :- दूसरा विभव सिरा (secondary potential terminal)
  • C1 :- पहला करंट सिरा (primary current terminal)
  • C2 :- दूसरा करंट सिरा (secondary current terminal)

इन चारों सीरों का E, P तथा C इलेक्ट्रोड के साथ जोड़ा जाता है। जैसा कि आपको चित्र में दिख रहा है। इसमें P1 तथा C1 को शॉर्ट करके E इलेक्ट्रोड से जोड़ा गया है जो कि अर्थ इलेक्ट्रोड है। P का कनेक्शन P2 टर्मिनल से है तथा C इलेक्ट्रोड का कनेक्शन C2 टर्मिनल से है।

 

 

अर्थ टेस्टर का उपयोग  कैसे करें (how to use of earth tester)

 

हम अर्थ टेस्टर को ऊपर दिए गए चित्र के अनुसार जोड़ते हैं। इस मे E अर्थ इलेक्ट्रोड है इसी अर्थ इलेक्ट्रोड का जमीन के साथ संपर्क प्रतिरोध ज्ञात करना है। यह अर्थ टेस्टर के P1 तथा C1 को शॉर्ट करके जहां पर अर्थिंग करना है वहीं पर जमीन में गाड़ दिया जाता है।

इसमें एक C इलेक्ट्रोड होता है, जो करंट इलेक्ट्रोड कहलाता है। इस इलेक्ट्रोड को earth इलेक्ट्रोड से 90 मीटर या 140 मीटर की दूरी पर जीन में गाड़ देते हैं।

अब एक P इलेक्ट्रोड होता है जिसको विभव इलेक्ट्रोड(potential electrode) कहते हैं। इस इलेक्ट्रोड को अर्थ इलेक्ट्रोड तथा करंट इलेक्ट्रोड के बिल्कुल मध्य में गाड़ा जाता है। मतलब कि अगर करंट इलेक्ट्रोड (C) को अर्थ इलेक्ट्रोड (E) से 90 मीटर की दूरी पर गाड़ा गया है तो विभव इलेक्ट्रोड (P) को दोनों के बीच यानी कि 45 मीटर की दूरी पर गाड़ देंगे। इसी प्रकार यदि दोनों के बीच की दूरी 140 मीटर है तो इलेक्ट्रोड को अर्थ इलेक्ट्रोड से 70 मीटर की दूरी पर गाड़ देंगे।

 

Tester से बिजली का झटका क्यों नही लगता है?

 

टेस्टर से बिजली का झटका क्यों नही लगता? क्योंकि हमारा शरीर 9 Volt तक बिजली के प्रवाह को सहन कर सकता है। इसलिए हमें टेस्टर से बिजली चेक करने पर करंट नही लगता है

 

महत्वपूर्ण बिंदु:-

 

अगर हम P तथा C इलेक्ट्रोड को बात करें तो ये इलेक्ट्रोड मिल्ड स्टील के छड़ों को नुकीला बनाया जाता है। जो 1.27 cm व्यास वाली होती है। इसकी लंबाई 1 मीटर होती है। इसको जमीन के नीचे 1/2 या 2/3 भाग गाड़ दिया जाता है।

उपर्युक्त सभी प्रकिया करने के बाद अब भी संपर्क प्रतिरोध ज्ञात करने की बारी आती है। अब हम अर्थ टेस्टर मे लगे हैंडल को 150 rpm की गति से घूमते है । Tester क्या है? जिससे यंत्र मे लगा परमानेंट मैग्नेट डीसी जनरेटर घूमता है और पूरे परिपथ में विद्युत धारा प्रवाहित करता है।

जिससे प्रतिरोध पैमाने पर उस अर्थ इलेक्ट्रोड तथा जमीन के बीच का प्रतिरोध दर्शाता है। जिसे नोट कर लिया जाता है। अगर भूमि का संपर्क प्रतिरोध 1 ओम से कम है तो वह स्थान earthing के लिए उचित माना जाता है।

 

 

Conclusion

 

मुझे उम्मीद है की आपको मेरी यह लेख Tester क्या है? अर्थ टेस्टर का उपयोग कैसे करें? पूरी जानकारी (2023)  जरुर पसंद आई होगी. मेरी हमेशा से यही कोशिश रहती है की readers को पूरी जानकारी प्रदान की जाये जिससे उन्हें किसी दुसरे sites या internet में उस article के सन्दर्भ में खोजने की जरुरत ही नहीं है. इससे उनकी समय की बचत भी होगी और एक ही जगह में उन्हें सभी information भी मिल जायेंगे.

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