Startup कंपनी क्या है? जानिये भारत में Startup Company क्या है?

दोस्तों Startup कंपनी क्या है आप सब तो आज कल काफ़ी कुछ सुन रहें होंगे की startup company success होके करोड़ों का business कर रही है। और ये सब न्यूज़ देख के आप लोग भी जानना चाहते होंगे की ये startup कम्पनी क्या है? कैसे काम करती है? और जो सक्सेस हो रहें हैं वो कैसे कम्पनी चालू किए हैं ?

आपमें से बहुत से लोग ख़ुद का business/कम्पनी शुरू करके अमीर बनने का सपना देखते होंगे लेकिन सही जानकारी नहीं मिल पाने के कारण उलझन में रहते होंगे ! यहाँ careerjankari में हम आपको startup के बारे में जानकारी देंगे ताकि आप अपने सपनो को पूरा कर सकें और आगे बढ़ सकें!

प्रधानमंत्री मोदी जी ने भी इन startups को सपोर्ट करने और देश को आगे बढ़ाने के लिए “StartUp India – StandUp India” योजना लॉंच किए थे। प्रधानमंत्री मोदी जी द्वारा शुरू की गयी योजना “StartUp India – StandUp India” के बारे में जानना चाहते होंगे तो इस पोस्ट को पूरा पढ़े।

क्या आप जानते हैं की Startup Company क्या है? इस StartUp शब्द को बहुत से लोग नए Ventures के साथ जोड़ते हैं, उनका मानना है की जहाँ युवा लोग कुछ अपना नया venture स्टार्ट करते है वो startup कम्पनी है। लेकिन सवाल उठता है की क्या सही मायने में Startup Companies का सही अर्थ यही है।

StartUp ऐसी Company होती है जो की ऐसी problem को solve करने में विश्वास रखती है जिसका solution स्पष्ट नहीं है और जिसमे success होने की भी कोई gurantee नहीं होती है. !

अगर आपको भी जानना है की आखिर ये स्टार्ट अप इंडिया क्या है तो इस Post को पूरी तरह से पढ़ें और अपने दोस्तों के लिए भी whatsapp, facebook, Twitter आप जो भी उसे करते हैं सभी में इसको share करें ताकि सभी को सही जानकारी मिल सके।

 

Startup कंपनी क्या है? जानिये भारत में Startup Company क्या है?
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Startup कंपनी क्या है? (What is a Startup Company)

 

एक Startup company या Startup उसे कहते हैं जो की एक ऐसा organization है जिसे design किया जाता है एक बड़े scalable और repeatable business model को प्राप्त करने के लिए. ये companies अक्सर नए बने हुए होते हैं और ये development के phase में होते हैं जिन्हें की दमदार market research की जरुरत होती है.

ये शब्द “StartUp” इसलिए इतनी ज्यादा famous हो गयी क्यूंकि जब dot-com bubble के दोरान बहुत सी नयी dot-com companies बनी थी तब लोग उस समय इन companies को startup companies कहकर भी पुकारते थे. जो की धीरे धीरे नए Companies के नाम होने का एक Trend बन गयी.

 

  

एक startup company को हम एक छोटे बच्चे के जैसे भी समझ सकते हैं जिसे की आगे बढ़ने में अभी समय है. ये companies ऐसे product or service offer करते हैं जो की पहले Market में उपलब्ध नहीं थी जिससे दुसरे लोगों को इससे बहुत फ़ायदा होता है.

 

Startup Culture क्या है? (What is Startup Culture)

 

Startup कभी कभी casual attitude को महत्व देते हैं ताकि उनके workplace में employees की eficiency बढाई जा सके. 1960 में Sir Douglas McGregor ने एक study से ये पाया गया है की Workplace में Stressed punishment और rewards की कोई जरुरत नहीं है अच्छे results पाने के लिए, ये उनके बिना भी हो सकता है.

कुछ लोग बिना की incentives के ही खुद motivated रहते हैं काम करने के लिए.

जब ये stress को उनके ऊपर से निकाल लिया गया तब उन्होंने पाया के workers और researchers अपने कामों में क्या focus दे पा रहे हैं जिससे overall productivity बढ़ जा रही है. इससे उन्हें अपने company के लिए कुछ ज्यादा achieve करने के लिए potential भी मिल रही है.

ये culture धीरे धीरे evolve हो रही है और इसे larger companies अपना रहे हैं ताकि वो Startups के bright minds को capture कर सकें. इसी प्रथा को आगे बढ़ाते हुए Google ने विगत कुछ वर्षों में ऐसे कई companies खरीद लिए हैं जिन्हें उन्हें लगा की आगे अच्छे return प्रदान कर सकते हैं.

इसके साथ ऐसे cultures से employees को काम करते वक़्त कोई stress नहीं होता है और वो अपना अच्छा productivity company को दे सकते हैं. वो ज्यादा comfortable महसूस करते हैं जिससे वो मन दे कर अपना काम कर सकते हैं.

 

Co-founders कोन हैं? (Who are the co-founders)

 

Co-founders उन लोगों को कहा जाता है जो की Startup companies के growth के दोरान उसके साथ involve रहे. कोई भी co-founder बन सकता है, चाहे वो company का आदमी हो या फिर बहार का.

मुख्य रूप से co-founder होते हैं Entrepreneurs, Engineers, Hackers, Venture Capitalist, Web Developer, Web Designers और दुसरे जो की पहले से ही इन Companies से जुड़े हुए होते हैं.

इसलिए Co-Founders की कोई legal definition नहीं होती है. किसी को Co-Founder तभी कहा जा सकता है जब उसके पास board of directors, investors or shareholders के विषय में जानकारी मेह्जुद हो और जो की अपना मन्तव्य रख पा रहा हो इन लोगों के सामने और Companies के दुसरे employees इसकी बात तो सुनें और अमल करने के लिए सोचें.

चूँकि Co-founders की कोई definitive agreement मेह्जुद नहीं है इसलिए आगे चलकर disputes का होना तो जायज सी बात है.

 

Internal Startups क्या है? (What is Internal Startups)

 

बड़े और well-established companies अकसर ये try करते हैं की कैसे ये खुद की Innovation तैयार करें, इसके लिए वो खुद ही Set Ups तैयार करते हैं जिन्हें की “internal startups” कहा जाता है.

ये Companies में एक अलग ही entity बनकर विकशित होते रहते हैं. और जब ये अपने नए Product के साथ market में आते हैं तब उन्हें उस Companies के under ही इसे launch करना होता है.

इससे बड़े companies को भी कहीं दुसरे companies को acquire करने की जरुरत नहीं है. जब वो खुद ही अपने products बना सकते हैं.

 

एक Startup हमेशा से Temporary होता है (A Startup is Always Temporary)

 

किसी भी Startup का organizational function होता है की वो हमेशा से एक repeatable और scalable business model की तलाश करे. एक प्रसिद्ध व्यक्ति ने कहा है की Startup Founder के तीन मुख्य function होते हैं :

1. Product और उसके features के बारे में एक vision प्रदान करें

2. Business Model के सभी चीज़ों के संधार्व में एक series of hypotheses create करें: जैसे की कोन हैं customers? क्या हैं Distribution channels ? कैसे हम company को बना और finance कर सकते हैं ? इत्यादि.

3. जल्द से ये validate कर लें की क्या model correct है ये देखकर की Customers का कैसे behaviour है.

 

Startups को कैसे Fund किया जाता है? (How are startups funded)

 

अगर हम Startup और small business की बात करें तब ये प्रारंभिक दोर में Founder’s saving, दोस्तों, family members या फिर Bank loans से ही fund किया जाता है.

लेकिन अगर StartUp Successful रहा तब इसे Angel Investors से additional funding मिलती है. और बाद में Venture Capitalist से और उसके बाद IPO (Initial Public Offering) से.

और ऐसे funding से Startup founder की equity बहुत हद तक ख़त्म हो जाती है लेकिन वहीँ company की owenership diversifies हो जाती है.

और ऐसे में आगे Startup के independent entity के हिसाब से नहीं रह पाती जिसे के बाद में कोई बड़ी company acquistion कर लेती है या किसी दुसरे company के साथ merge हो जाती है. Startup कंपनी क्या है किसी छोटे Business Owner के लिए ऐसे अपने control खोना भरी पड़ सकता है लेकिन Startup में ऐसा होना growth के लिए बहुत जरुरी है.

देखा जाये तो Startup owner और small business owner दोनों entrepreneurs हैं लेकिन दोनों के primary function और funding सब अलग हैं अपने अपने business model के हिसाब से.

 

भारत में Startup Company क्या है? (What is a Startup Company in India)

 

जब भी हम ये शब्द “Startup” सुनते हैं तब अक्सर हम थोडा confuse होते हैं की ये दोनों words “business” और “Startup”के भीतर क्या अंतर है. भारत में अगर आप कोई भी नयी चीज़ की शुरुवात करते हैं तब उसे केवल Business ही कहा जाता है, न की Startup. तो चलिए समझते हैं की आखिर ये Startup company भारत में क्या है.

Startup Company basically बहुत ही अलग हैं traditional business से, इसीलिए मैंने निचे कुछ महत्वपूर्ण points के विषय में mention किया है जो की आपको Startup companies के बारे में समझने के लिए मदद करेंगे.

 

भारत में Startup Company (Startup Company in India)

 

अगर हम Growth की बात करें
जब भी हम traditional business की बात करते हैं तब वहां growth के लिए कम scalability रहती है लेकिन Startup की बात ही कुछ अलग है क्यूंकि ये companies बहुत ही जल्द बढती है और बहुत ही कम समय में पुरे देश में बड़ी market capture कर लेती हैं.

भारत में ज्यादातर startup Technology Based होते हैं जिनकी low cost में high scalability होती है. उदहारण के तोर पे आप PayTm को ले सकते हैं जो की एक Startup comapany FinTech ही है.

अब जो Mobile Wallet Business में बड़ी जोर से growth दिखा रही है और बहुत कम समय में Online Mobile Payment की Market की एक बहुत ही बड़ी % को capture कर लिया है.

अगर आप किसी छोटे से market में Software बेच रहे हों तब आपको Startup company नहीं कहा जायेगा. Startup में हमेशा innovation की जरुरत होती है और जिनकी high scalability होती है.

 

Business के लिए Funding

 

Traditional Business और StartUps दोनों में Funding की जरुरत होती है अपने business को चलाने के लिये. Traditional Business के पास केवल एक option होता है पैसे के लिए जो की है Bank’s Loan.

जिसे के उन्हें Securities देने के बाद मिलता है. वहीँ StartUps में कई उपाय हैं funding के लिए जैसे की Angel Investor or Venture Capitalist इत्यादि. जो की आपको पैसे देते हैं Shares या Equity के बदले में, यहाँ वो आपको किसी security की demand नहीं करते हैं.

यहाँ Investors को high scalability और growth companies की तलाश होती है जो की उन्हें high return प्रदान करें. इसलिए जिन StartUps में ये Investors अपना पैसा लगाते हैं वो उन्हें Mentorship भी प्रदान करते हैं Business को चलने के लिए.

 

Exit strategy का होना Starting में

 

Traditional Busines में अगर आपका Loss हो जाये business में तब आप उसे बंद करके दूसरा business चुन सकते हैं क्यूंकि यहाँ ownership आपके under होती है।

वहीँ StartUp में चूँकि funding Angel Investor या Venture Capitalist करते हैं इसलिए starting में ही आपके पास Exit Strategy रहती है जैसे की दुसरे company के साथ merge होना, Startup कंपनी क्या है दुसरे बड़े company के द्वारा acquisition होना or IPO.

इसलिए यहाँ Investor आसानी से अपने Share को दुसरे Company या लोगों को बेचकर अच्छे returns के बदले exit कर सकता है.

 

Working culture

 

Traditional Business में Traditional working culture होती है भारत में लेकिन Startups की बात ही कुछ और है यहाँ पर Employees का ख़ास ख्याल रखा जाता है.

यहाँ उनके offices को attractive बनाया जाता है जिसके साथ अच्छे perks भी मिलते हैं. कुछ Startup companies तो अपने employees को salary के साथ shares भी प्रदान करते हैं कम दामों में जिससे employees का motivation हमेशा बना रहे.

 

USP

 

Traditional business का हमेशा से similar nature, strategy और process होता है business करने का लेकिन Startups companies भारत में पहले से ही काफी innovative थे जिससे उनकी Business simplify हो जाती है और इससे Customer और Market के भीतर के बेहतर USP बना रहता है.

ये थे कुछ महत्वपूर्ण 5 points जो की भारत में StartUp Companies को define करते हैं. NASSCOM Report India के मुताबिक India पुरे विश्व में 3rd position में आता है Startup ecosystem में.

 

 

StartUp में काम करने से लाभ और हानि

 

वैसे तो कोई भी काम करने के कुछ न कुछ फायदे और नुकसान होते ही हैं. ठीक वैसे ही Startup में काम करने के फायदे और नुकसान दोनों हैं. तो चलिए जानते हैं की इसमें काम करने के क्या फायदे और नुकसान हैं.

 

Startup से लाभ

 

1. Unique Experience का होना – यहाँ पर काम करने में आपको एक unique experience प्राप्त होगा. यहाँ पर Hallways में केवल gaming rooms और skateboarding नहीं होती है उनके अलावा भी यहाँ काम करने के कई संसाधन होते हैं.

Startups को ये अच्छे से मालूम होता है की कैसे काम करने के favourable environment तैयार करें. Startup कंपनी क्या है किसी भी business को आगे बढ़ाने के लिए creativity और innovation की जरुरत होती है, जिसके लिए एक stimulating workforce का होना अत्यंत जरुरी होती है.

2. सिखने के लिए बहुत कुछ होता है – Startups में employees के ऊपर बहुत सारा दायित्व होता है जिससे उन्हें बहुत कुछ सिखने को मिलता है. वो आपको इसलिए चुनते हैं क्यूंकि आपकी skill उतनी अच्छी होती है, लेकिन founders आपसे और भी ज्यादा की उम्मीद रखते हैं.

आप starup को सभी तरह से आगे बढ़ने के लिए मदद करते हैं. अकसर आप अपने job description से ज्यादा काम करते हैं जिससे आपको एक अच्छी opportunity मिलती हैं नया कुछ सिखने के लिए.

Founders और employees एक साथ काम करते हैं मिलकर, इसलिए यहाँ middle management नहीं होती, जिसकारण आपको best लोगों से सीखने को मिलती हैं.

3. यहाँ पर Employees बिना किसी supervision के काम करती हैं. वो इसमें smart decision लेते हैं और उनके परिणामों के लिए तैयार रहते हैं. जिससे उन्हें हमेशा आगे बढ़ने के लिए motivation मिलती है.

4. आप innovate कर सकते हैं – Startups को जल्दी बढ़ने की जरुरत होती है. अगर वो समय रहते आगे न बढ़ें तब उन्हें कुचला भी जा सकता है. Employees को अपनी talent दिखने के पूर्ण अवसर मिलता हैं.

अगर उनके ideas को higher official पसंद करती है तब इसके लिए उन्हें incentive भी प्रदान की जाती है ऐसे अच्छे काम करने के लिए.

5. हमेशा आगे बढ़ने के लिए यहाँ pressure होती है, लेकिन एक dynamic energy startup को आगे बढ़ने के लिए हमेशा drive करती है. एक अजीब सा सुकून मिलता है अपने company को बढ़ते और घटते देख और यही चीज़ अपने team के साथ share करने से और भी खुशी प्राप्त होती है.

  • यहाँ के perks – पैसे ही नहीं इसके साथ आपको और भी दुसरे perks मिलते हैं जो की आको यहाँ काम करने के लिए उत्साहित करते हैं जैसे की :
  • आप home या घर से काम कर सकते हैं
  • छोटे work weeks का होना
  • बहुत ही casual atmosphere
  • gym और दुसरे health facilities
  • employee के लिए discounts और free services
  • free food (और कभी कभी drinks!)

 

अगर हम लम्बे समय के benifit की बात करें तब भी हमें company के तरफ से बहुत से चीज़ें मिल सकती है, जैसे की एक अच्छी सी position (senior position, VC, Chairman), इसके साथ employees को इसमें अच्छे stock option भी मिलते हैं.

Job satisfaction – Employees यहाँ comapany की जन्म, growth और success को share करते हैं. उसी लिए ये अभी के generation के लिए एक बहुत ही अच्छा career path है. Startup कंपनी क्या है उन्हें किसी एक अच्छे चीज़ का हिस्सा बनने की जरुरत होती है. जब company अच्छा perform करती है तब वो गर्व कर सकते हैं की उनका इसमें कितना योगदान था.

 

Startup से हानि

1. Workload का ज्यादा होना – ये तय कर लें की आपको यहाँ बहुत समय तक काम करना होगा , बहुत ही कम छुट्टी मिलती है और कम vacation भी मिलता है.

Startup हमेशा से trend के साथ काम करता है और इसलिए उन्हें trend के साथ हमेशा change होना होता है cometition में हमेशा हिस्सा लेने के लिए. इसलिए Employees को ज्यादा effort देना पड़ता है. जिससे उन्हें stress होना आम सी बात है.

2. Job की stability/security – आप भले ही अपने काम को बहुत पसंद करते हों लेकिन आप इसे ज्यादा देर तक कायम नहीं रख सकते हैं.

Research से ये बात सामने आई है की 90% startup अपने पहले 3 सालों के भीतर ही ख़त्म हो जाते हैं. मुख्य रूप से ये Tech Startup के साथ ये ज्यादा होता है क्यूंकि नए invention से उनके business को बहुत ज्यादा नुकसान पहुँचता है.

3. Startup founders के पास बहुत ही brilliant idea होता है जिससे वो अपने venture के लिए अच्छा खासा seed money निकाल लेते हैं. लेकिन इससे वो experinece leader नहीं बन जाते हैं. Strong Mentors की कमी उनके job stability को बहुत पहुंचती है.

4. आप यहाँ ज्यादा नहीं कमा सकते हैं initial दिनों में – Investors कभी भी aspiring entrepreneurs को ज्यादा salary नहीं देते हैं. वो मुख्यतः operating costs, product development, और customer base को बढ़ाने में ज्यादा पैसे लगाते हैं. ज्यादातर cases में traditional companies की तुलना में startup में salaries कम ही होती है.

5. Social life का कम होना – आप भले ही अपने office में काफी मस्ती कर रहे हों लेकिन आपको बहुत मेहनत भी करनी पड़ती है. यहाँ पर Employees को extreme pressure में काम करना पड़ता है ताकि loss को कम किया जा सके.

जिसके कारण social life अपने आप ही कम हो जाता है. Work-life balance थोडा मुस्किल होता है और ज्यादा काम करने से आपकी सेहत में खराबी भी दिख सकती है.

Startup तब भी fight करते हैं जब वो बहुत ही बड़े मुकाम हासिल कर लेते हैं क्यूंकि technology बदल रही है और Competition दिनबदिन और भी ज्यादा मुस्किल होते जा रहा है.

यहाँ एक भी गलत कदम आपको race से बहार कर सकता है. इसलिए Startup की लढाई हमेशा से जरी है और ऐसे ही रहेगी.

 

 

Conclusion

  

तो दोस्तों मुझे उम्मीद है की आपको मेरी यह लेख Startup कंपनी क्या है? जानिये भारत में Startup Company क्या है?  जरुर पसंद आई होगी. मेरी हमेशा से यही कोशिश रहती है की readers को पूरी जानकारी प्रदान की जाये जिससे उन्हें किसी दुसरे sites या internet में उस article के सन्दर्भ में खोजने की जरुरत ही नहीं है. इससे उनकी समय की बचत भी होगी और एक ही जगह में उन्हें सभी information भी मिल जायेंगे.

यदि आपके मन में इस article को लेकर कोई भी doubts हैं या आप चाहते हैं की इसमें कुछ सुधार होनी चाहिए, तब इसके लिए आप नीचे comments लिख सकते हैं.यदि आपको यह लेख पसंद आया या कुछ सीखने को मिला तब कृपया इस पोस्ट को Social Networks जैसे कि Facebook, Twitter इत्यादि पर share कीजिये.


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