कुकरा बासत आगे – चंपा निषाद Suwa Geet Lyrics
कुकरा बासत आगे – चंपा निषाद | Kukra Basat Aage Saga Pahuna Lyrics | Champa Nishad | Suwa Geet Lyrics
दोस्तों नमस्कार आज हम आपको इस लेख में चंपा निषाद जी का गीत का लिरिक्स दिए है।। गीत का नाम कुकरा बासत आगे सगा है। चंपा निषाद की गीत को भारत देश में लोग बड़े प्यार और स्नेह देते है। चंपा निषाद जी के गीत में कुछ अलग ही छाप होता है। तो चंपा निषाद द्वारा स्वर दिया हुआ गीत कुकरा बासत सगा लिरिक्स का आनंद उठाते है।।
कुकरा बासत आगे सगा पहुँना
Kukra Basat Aage Lyrics
Champa Nishad Suwa Geet
- गीत : कुकरा बासत आगे
- गायिका : चंपा निषाद
- गीतकार : शुक्कु बारीक
- संगीतकार : विवेक शर्मा
- लेबल : Creative Vision
Kukra Basat Aage Saga Pahuna Lyrics | Champa Nishad | Suwa Geet Lyrics
स्थायी
तरी हरी ना मोरे नाहानारे सुवाना
कुकरा बासत आगे सगा पहूंना
तरी हरी ना मोरे नाहानारे सुवाना
कुकरा बासत आगे सगा पहूंना
तरी हरी ना मोरे नाहानारे सुवाना
कुकरा बासत आगे सगा पहूंना
अंतरा 1
को मोर लागे सुवा का तोरे लागे वो
कुकरा बासत आगे सगा पहूंना
कोना तोला दुआ दीही कोन तोना साधे वो
कुकरा बासत आगे सगा पहूंना
तरी हरी ना मोरे नाहानारे सुवाना
कुकरा बासत आगे सगा पहूंना
अंतरा 2
सास मोर लागे सुवा ससुर तोरे लागे वो
कुकरा बासत आगे सगा पहूंना
जेठ मोला दुआ दीही जेठानी हा साधे वो
कुकरा बासत आगे सगा पहूंना
तरी हरी ना मोरे नाहानारे सुवाना
कुकरा बासत आगे सगा पहूंना
अंतरा 3
देवर मोरे लागे सुवा देरानी तोरे लागे वो
कुकरा बासत आगे सगा पहूंना
भौजी दुआ दीही मोला ननंद मोला साधे वो
तरी हरी ना मोरे नाहानारे सुवाना
कुकरा बासत आगे सगा पहूंना
हा तरी हरी ना मोरे नाहानारे सुवाना
कुकरा बासत आगे सगा पहूंना
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